Thursday, 5 Feb 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > अन्य > काली नदी: देवी महाकाली की पवित्र धारा और आस्था का प्रतीक
अन्य

काली नदी: देवी महाकाली की पवित्र धारा और आस्था का प्रतीक

दिव्यसुधा
Last updated: November 6, 2025 4:48 pm
दिव्यसुधा
Share
काली नदी उत्तराखंड, देवी महाकाली की पवित्र नदी, काली गंगा का धार्मिक महत्व
काली नदी, जिसे काली गंगा या शारदा नदी के नाम से भी जाना जाता है, उत्तराखंड से निकलकर नेपाल और उत्तर प्रदेश तक बहती है। इसे देवी का स्वरूप माना जाता है।
SHARE

भारत में नदियों को न केवल जल का स्रोत, बल्कि देवी स्वरूप माना गया है। हर नदी की अपनी एक कहानी, एक आस्था और एक पहचान होती है। ऐसी ही एक पवित्र नदी है काली नदी, जिसे श्रद्धा से काली गंगा भी कहा जाता है। इस नदी को ‘देवी’ का दर्जा प्राप्त है, और कहा जाता है कि इसके जल के स्पर्श मात्र से व्यक्ति के सारे रोग-दोष और पाप मिट जाते हैं।

काली नदी का उद्गम और धार्मिक महत्व

काली नदी का उद्गम उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के पास स्थित लिपुलेख दर्रे से होता है। यह वही इलाका है जहाँ से कैलाश मानसरोवर यात्रा का पवित्र मार्ग भी गुजरता है। यह नदी भारत और नेपाल की सीमा रेखा बनाते हुए दोनों देशों की भूमि को सींचती है। स्थानीय लोग इसे “काली गाड़” या “काली गंगा” के नाम से पुकारते हैं। माना जाता है कि इस नदी के तट पर देवी महाकाली का वास है, जो बुराई का नाश कर धर्म की रक्षा करती हैं।

काली नदी को ‘काली गंगा’ क्यों कहा जाता है

इस नदी का जल गहरा और थोड़ा धूसर होता है, जो इसे ‘काली’ नाम देता है। लेकिन इसका अर्थ नकारात्मक नहीं, बल्कि शक्ति और रक्षा से जुड़ा है। देवी काली जिस प्रकार अपने भक्तों की रक्षा करती हैं, उसी प्रकार यह नदी अपने आसपास के क्षेत्रों को जीवन देती है। यही कारण है कि उत्तराखंड और नेपाल दोनों में इसे देवी स्वरूप “काली गंगा” के रूप में पूजा जाता है।

यूपी में बदल जाता है नाम – बन जाती है शारदा नदी

जब यह नदी उत्तराखंड से बहती हुई उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती है, तो इसका नाम बदल जाता है। यूपी में इसे “शारदा नदी” के नाम से जाना जाता है। इस नाम का संबंध देवी शारदा (देवी सरस्वती का एक रूप) से है, जो ज्ञान और बुद्धि की देवी हैं। इसलिए इस नदी के जल को “बुद्धि और शांति देने वाला जल” कहा जाता है।

रोग, दोष और पापों का नाश करने वाली नदी

स्थानीय मान्यता है कि जो व्यक्ति काली नदी में स्नान करता है या इसके जल का छिड़काव करता है, उसके जीवन से सभी नकारात्मक ऊर्जा, रोग और दोष समाप्त हो जाते हैं। यह नदी सिर्फ शरीर को नहीं, आत्मा को भी पवित्र कर देती है। इसके जल का उपयोग पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है।

जीवनदायिनी धारा

काली नदी केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि जीवन के आधार के रूप में भी महत्वपूर्ण है। इसका जल उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कई गांवों, खेतों और नगरों को सींचता है। यह नदी घाघरा नदी की एक प्रमुख सहायक धारा मानी जाती है, जो आगे चलकर गंगा से मिलती है।

महाकाली मेला – आस्था का उत्सव

हर वर्ष काली नदी के तट पर महाकाली मेला आयोजित किया जाता है। इस दौरान हजारों श्रद्धालु नदी में स्नान करते हैं और देवी महाकाली की पूजा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस मेले में शामिल होकर और नदी के जल का दर्शन करने से पापों का क्षय होता है और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

काली नदी केवल एक प्राकृतिक धारा नहीं, बल्कि आस्था, शक्ति और शुद्धता का प्रतीक है। यह हमें यह संदेश देती है कि जैसे इसका जल अंधकार को धोकर जीवन में नई ऊर्जा लाता है, वैसे ही श्रद्धा और भक्ति हमारे भीतर के अंधकार को दूर करती है। इसलिए काली नदी, जिसे लोग काली गंगा और शारदा के रूप में पूजते हैं, आज भी भारत की आध्यात्मिक धरोहर और जीवन का आधार बनी हुई है।

Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article श्री गुड्डदा रंगनाथस्वामी मंदिर का दिव्य पत्थर, कर्नाटक का चमत्कारी मंदिर श्री गुड्डदा रंगनाथस्वामी मंदिर कर्नाटक : दिव्य पत्थर जो बताता है आपकी मन्नत पूरी होगी या नहीं
Next Article आज का राशिफल – बारह राशियों का दैनिक भविष्यफल और ज्योतिषीय विश्लेषण आज का राशिफल: बारह राशियों का दैनिक भविष्यफल और ग्रहों की चाल
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

बसंत पंचमी 2026 पर माता सरस्वती की पूजा करती हुई प्रतिमा
अन्य

बसंत पंचमी 2026: माता सरस्वती की पूजा की शुरुआत और पौराणिक कथा

By दिव्यसुधा
हनुमान जी के 108 नामों का जाप करते हुए
अन्य

हनुमान जी के 108 नाम – भक्ति, जाप और आध्यात्मिक शक्ति

By दिव्यसुधा
अच्छा समय आने के शुभ संकेत — चिड़िया का घोंसला, चींटियाँ, उल्लू, शंख की ध्वनि।
अन्य

अच्छा समय आने से पहले दिखाई देते हैं ये शुभ संकेत

By दिव्यसुधा
अन्य

Harnessing the Body’s Natural Processes for Lifelong Health

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?