Thursday, 5 Feb 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > बैकुंठ चतुर्दशी के दिन विष्णु और शिव की एकसाथ पूजा क्यों है जरूरी? जानें क्या मिलता है आशीर्वाद
व्रत और त्योहार

बैकुंठ चतुर्दशी के दिन विष्णु और शिव की एकसाथ पूजा क्यों है जरूरी? जानें क्या मिलता है आशीर्वाद

दिव्यसुधा
Last updated: November 2, 2025 3:38 pm
दिव्यसुधा
Share
बैकुंठ चतुर्दशी पर भगवान विष्णु और भगवान शिव की संयुक्त पूजा, वाराणसी में दीपदान और भक्ति उत्सव का दृश्य
वाराणसी में बैकुंठ चतुर्दशी पर हरि-हर की आरती का भव्य दृश्य — मोक्ष, भक्ति और ज्ञान का संगम।
SHARE


हिंदू धर्म में बैकुंठ चतुर्दशी का पर्व अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया है। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव की संयुक्त पूजा का विशेष महत्व होता है। बैकुंठ चतुर्दशी सृष्टि के संतुलन और समरसता का प्रतीक मानी जाती है, क्योंकि यह दिन सृष्टि के पालनकर्ता विष्णु और संहारकर्ता शिव के मिलन का उत्सव है।

बैकुंठ चतुर्दशी का अर्थ और महत्व
‘बैकुंठ’ शब्द भगवान विष्णु के लोक को दर्शाता है, जो मोक्ष का प्रतीक माना जाता है। ‘चतुर्दशी’ का अर्थ है – महीने के शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की चौदहवीं तिथि। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु स्वयं काशी (वाराणसी) में जाकर भगवान शिव की पूजा करते हैं। यह दिन केवल भक्ति का नहीं, बल्कि सृष्टि के दो मुख्य सिद्धांतों — पालन और परिवर्तन — के मिलन का प्रतीक है। इस दिन की पूजा से व्यक्ति को मोक्ष, ज्ञान और भक्ति तीनों का वरदान प्राप्त होता है।

पौराणिक कथा
बैकुंठ चतुर्दशी से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु ने यह निश्चय किया कि वे सहस्र (1000) कमलों से भगवान शिव का अभिषेक करेंगे। जब पूजा के समय उन्होंने गिनती की तो पाया कि एक कमल कम है। तब उन्होंने अपने कमलनयन (नेत्र) को ही कमल के रूप में अर्पित कर दिया। विष्णु के इस समर्पण और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें ‘बैकुंठ लोक’ का अधिपति बनने का आशीर्वाद दिया। तभी से यह दिन “बैकुंठ चतुर्दशी” कहलाने लगा। इस कथा से यह संदेश मिलता है कि सच्ची भक्ति और समर्पण से ही ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।

पूजा विधि और धार्मिक आस्था
बैकुंठ चतुर्दशी के दिन प्रातःकाल गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। भक्त इस दिन शिवालय में जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं, उन पर बिल्वपत्र, धतूरा और पुष्प चढ़ाते हैं। इसके साथ ही भगवान विष्णु की पूजा तुलसी, पीले पुष्प और शालिग्राम से की जाती है। पूजा के समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” और “ॐ नमः शिवाय” मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है। जो व्यक्ति इस दिन विष्णु और शिव दोनों की आराधना करता है, उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है और उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। कहा जाता है कि इस दिन काशी में गंगा स्नान और दीपदान करने से हजारों यज्ञों के समान पुण्य की प्राप्ति होती है।

वाराणसी में विशेष आयोजन
वाराणसी, जो स्वयं भगवान शिव की नगरी मानी जाती है, में बैकुंठ चतुर्दशी का विशेष उत्सव मनाया जाता है। इस दिन गंगा घाटों पर दीपदान, भजन-कीर्तन और शिव-विष्णु की संयुक्त आरती का भव्य आयोजन होता है। भक्त पूरी रात जागरण करते हैं और भगवान के नाम का स्मरण करते हैं।


बैकुंठ चतुर्दशी का पर्व केवल पूजा-अर्चना का दिन नहीं है, बल्कि यह जीवन के उस संतुलन का प्रतीक है जिसमें पालन और परिवर्तन दोनों का सामंजस्य है। इस दिन शिव और विष्णु की एक साथ पूजा करके मनुष्य अपने भीतर की द्वैतता को समाप्त कर आत्मिक शांति, मोक्ष और दिव्य कृपा का अनुभव करता है।

TAGGED:कार्तिक मासबैकुंठ चतुर्दशीबैकुंठ चतुर्दशी कथाबैकुंठ धामभगवान विष्णुभगवान शिवमोक्ष पर्ववाराणसी उत्सवशिव विष्णु पूजाहरि हर मिलनहिंदू त्योहार
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article साप्ताहिक लव राशिफल 3 से 9 नवंबर 2025 – नीच भंग योग से मेष, मिथुन, तुला और मकर राशि की लव लाइफ में आएगा सुधार साप्ताहिक लव राशिफल 3 से 9 नवंबर 2025 – नीच भंग योग से चमकेगी लव लाइफ
Next Article नवंबर 2025 प्रदोष व्रत पूजा करते श्रद्धालु, भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करते हुए नवंबर महीने का पहला प्रदोष व्रत 2025 : कब है, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

देव दीपावली 2025 पर गंगा घाटों पर दीपदान, भगवान शिव की आराधना और भक्तों की पूजा
अन्य

देव दीपावली 2025: इस विधि से करें महादेव की पूजा, दूर होंगे जीवन के सभी दुख

By दिव्यसुधा
bhagwan vishnu mata laxmi
व्रत और त्योहार

विजया एकादशी, जानिए व्रत की महिमा और कथा

By दिव्यसुधा
देवउठनी एकादशी 2025 में भगवान विष्णु का जागरण और पूजा विधि
व्रत और त्योहार

देवउठनी एकादशी 2025: 1 नवंबर को जागेंगे भगवान विष्णु, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

By दिव्यसुधा
व्रत और त्योहार

रवि प्रदोष व्रत पर करें ये विशेष उपाय, बदल सकता है भाग्य

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?