कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि इस साल 25 अक्टूबर को है। इस दिन विनायक चतुर्थी और छठ पूजा का पहला दिन ‘नहाय खाय’ मनाया जाएगा। यह दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत रखने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन विनायक चतुर्थी का व्रत रखने से घर में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होती है। सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं और जीवन में बाधाएँ दूर होती हैं।
विनायक चतुर्थी का धार्मिक महत्व
विनायक चतुर्थी प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश के समर्पित होती है। इस शुभ अवसर पर श्रद्धालु भक्ति भाव से गणेश जी की पूजा करते हैं। विशेष रूप से छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि से होती है। इस दिन नहाय खाय का आयोजन किया जाता है, जबकि अगले दिन खरना और उसके बाद डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस वर्ष नहाय खाय और विनायक चतुर्थी दोनों का आयोजन 25 अक्टूबर को ही होगा।
पूजा विधि
व्रत और पूजा विधि इस प्रकार है:
- सूर्योदय से पहले उठकर घर की सफाई करें और गंगाजल युक्त पानी से स्नान करें।
- आचमन कर स्वयं को शुद्ध करें और पीले रंग के कपड़े पहनें।
- सूर्यदेव को जल अर्घ्य देकर पंचोपचार के साथ विधि विधान से भगवान गणेश की पूजा करें।
- पूजा के समय गणेश चालीसा का पाठ करें और मंत्रों का जप करें।
- पूजा के अंत में आरती करें और भगवान गणेश से सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति की प्रार्थना करें।
विनायक चतुर्थी के प्रमुख मंत्र
- वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
- ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥
- दन्ताभये चक्रवरौ दधानं, कराग्रगं स्वर्णघटं त्रिनेत्रम्। धृताब्जयालिङ्गितमाब्धि पुत्र्या-लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे॥
- ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं चिरचिर गणपतिवर वर देयं मम वाँछितार्थ कुरु कुरु स्वाहा।
- ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।