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दिव्य सुधा > अन्य > दीपावली पर पताशा और चीनी के खिलौनों का रहस्य: मिठास में छिपा आध्यात्मिक संदेश
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दीपावली पर पताशा और चीनी के खिलौनों का रहस्य: मिठास में छिपा आध्यात्मिक संदेश

दिव्यसुधा
Last updated: October 31, 2025 4:38 pm
दिव्यसुधा
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दीपावली पूजा में पताशा और चीनी के खिलौनों का महत्व, मां लक्ष्मी और गणेश जी को अर्पित किए जा रहे पताशे और मिठाइयाँ
दीपावली पूजा में अर्पित किए गए पताशा और चीनी के खिलौने – परंपरा में मिठास और श्रद्धा का संगम
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दीपावली, जिसे दीपोत्सव या प्रकाश पर्व के नाम से भी जाना जाता है, हर वर्ष हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है जब साल की सबसे अंधेरी रात दिव्य दीपों की ज्योति से जगमगा उठती है। इस वर्ष दीपावली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन लोग माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं ताकि उनके घर में सुख, शांति, समृद्धि और धन की वर्षा हो। पूजा के दौरान कई पारंपरिक वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है जिनमें चीनी के खिलौने और पताशा विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हम इन्हें क्यों खरीदते हैं?

पताशा का आध्यात्मिक अर्थ

पताशा, छोटे सफेद चीनी के दाने, केवल मिठास का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि ये शुद्धता, सच्चाई और भक्ति का प्रतीक हैं। हिंदू परंपरा में माना जाता है कि पूजा में पताशा का प्रयोग हमारे विचारों, वचनों और कर्मों में मिठास और पवित्रता लाने का संकेत देता है। दीपावली की पूजा में माँ लक्ष्मी और गणेश जी को पताशा अर्पित करना शुभ माना गया है। यह न केवल भक्त और भगवान के बीच प्रेम का बंधन मजबूत करता है बल्कि घर में सुख, शांति और वैवाहिक सौहार्द भी बढ़ाता है। कहा जाता है कि शुद्ध सफेद पताशा का प्रयोग करने से व्यक्ति के जीवन में लक्ष्मी कृपा बनी रहती है। इसलिए पूजा के लिए हमेशा सफेद, नए और साफ पताशे ही खरीदें। पुराने, चिपचिपे या रंगीन पताशे अशुद्ध माने जाते हैं और शुभ नहीं माने जाते। पताशा हमें यह भी सिखाता है कि जैसे चीनी हर चीज़ में मिठास घोल देती है, वैसे ही हमें भी अपने जीवन में प्रेम, दया और नम्रता बनाए रखनी चाहिए।

चीनी के खिलौनों का महत्व

दीपावली पर बनाए जाने वाले चीनी के खिलौने केवल सजावट का साधन नहीं हैं, बल्कि ये श्रद्धा और आस्था के प्रतीक हैं। पारंपरिक रूप से बनाए गए ये खिलौने हाथों से गढ़े जाते हैं इनमें भगवान, हाथी, तोते, दीपक और मंदिर जैसी आकृतियाँ शामिल होती हैं।

हर आकृति का एक विशेष अर्थ होता है

  • हाथी बुद्धि और शक्ति का प्रतीक है, जो भगवान गणेश से जुड़ा है।
  • दीपक ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक है, जो अंधकार पर विजय का संदेश देता है।
  • तोता आनंद और संवाद का प्रतीक माना जाता है।

इन खिलौनों को पूजा की थाली में सजाना शुभ माना जाता है क्योंकि यह श्रद्धा, सादगी और निर्मलता को दर्शाता है। पहले इन्हें शुद्ध चीनी और प्राकृतिक रंगों से तैयार किया जाता था, और आज भी हाथ से बने खिलौने अधिक पवित्र और ऊर्जावान माने जाते हैं। मशीन से बने या केमिकल रंगों वाले खिलौनों से बचना चाहिए, क्योंकि उनमें वह धार्मिक शुद्धता नहीं रहती। हाथ से बने, प्राकृतिक रंगों वाले चीनी के खिलौने न केवल पूजा का सौंदर्य बढ़ाते हैं बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा और शुभता भी लाते हैं।

क्या ध्यान रखें जब खरीदें पताशा और चीनी के खिलौने

  • हमेशा सफेद, साफ और नए पताशे ही खरीदें।
  • पुराने, पीले या चिपचिपे पताशों का प्रयोग न करें।
  • हाथ से बने चीनी के खिलौने चुनें, जिनमें हाथी, दीपक, कमल या पक्षी की आकृति हो।
  • केमिकल रंगों से बने खिलौनों से बचें ये पूजा के लिए अशुद्ध माने जाते हैं।

जब इन वस्तुओं को श्रद्धा से खरीदा और अर्पित किया जाता है, तो यह न केवल देवी-देवताओं को प्रसन्न करती हैं बल्कि व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य भी लाती हैं। दीपावली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जीवन में प्रकाश, प्रेम और पवित्रता लाने का अवसर है। पताशा और चीनी के खिलौने हमें याद दिलाते हैं कि असली भक्ति बाहरी भव्यता में नहीं, बल्कि सादगी और सच्चे प्रेम में बसती है।जैसे ये मिठास हमारे जीवन में आनंद घोलती है, वैसे ही हमें भी हर दिन किसी के जीवन में मिठास और प्रकाश फैलाने का प्रयास करना चाहिए।

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