Saturday, 30 Aug 2025
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > featured > पितृपक्ष में गर्भवती महिलाएं क्या न करें, बच्चे पर पड़ सकता है असर सावधानियाँ, परंपराएँ और वैज्ञानिक प्रभाव
featuredवास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

पितृपक्ष में गर्भवती महिलाएं क्या न करें, बच्चे पर पड़ सकता है असर सावधानियाँ, परंपराएँ और वैज्ञानिक प्रभाव

पितृपक्ष की परंपराएं केवल आस्था ही नहीं, बल्कि गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और मानसिक शांति की भी रक्षा करती हैं।

दिव्यसुधा
Last updated: August 29, 2025 6:45 pm
दिव्यसुधा
Share
गर्भवती महिलाओं के लिए पितृपक्ष में सावधानियाँ — परंपरा और विज्ञान का संतुलन
SHARE
Highlights
  • पितृपक्ष में गर्भवती महिलाओं को तामसिक भोजन से बचना चाहिए।
  • श्राद्ध का भोजन न छुएं और न खाएं।
  • पिंडदान या तर्पण स्थलों पर न जाएं।

आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक चलने वाला पितृपक्ष हिंदू धर्म में बेहद पवित्र समय माना जाता है। इसे श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है। इस दौरान परिवारजन अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और आशीर्वाद के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। लोक मान्यताओं के अनुसार, इन 16 दिनों तक पितरों की आत्माएं धरती पर आती हैं और सर्वपितृ अमावस्या को वापस अपने लोक में चली जाती हैं।

इसी संवेदनशील समय में गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। पुरानी परंपराएं और धार्मिक मान्यताएं उन्हें कुछ कार्यों से दूर रहने का संकेत देती हैं। माना जाता है कि इन परंपराओं का पालन करने से माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों सुरक्षित रहते हैं।

क्यों जरूरी है गर्भवती महिलाओं के लिए सतर्कता?
पंडितों और शास्त्रों के अनुसार, पितृपक्ष ऐसा समय है जब वातावरण में सूक्ष्म ऊर्जा और धार्मिक गतिविधियों का प्रभाव अधिक होता है। इस स्थिति में गर्भवती महिलाएं अगर परंपराओं का पालन करती हैं तो उन्हें मानसिक शांति और सुरक्षा का अनुभव होता है। दूसरी ओर, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इन नियमों का पालन स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति को संतुलित बनाए रखने में सहायक हो सकता है।

पितृपक्ष में गर्भवती महिलाओं को क्या नहीं करना चाहिए?

  1. तामसिक भोजन से परहेज

इस दौरान मांसाहार, प्याज-लहसुन और तला-भुना भोजन वर्जित माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यह अशुद्ध ऊर्जा को आकर्षित करता है। गर्भवती महिलाओं के लिए हल्का और सात्विक भोजन (जैसे दाल, रोटी, हरी सब्जियाँ, हल्दी, तुलसी युक्त आहार) अधिक सुरक्षित और पाचन के लिए लाभकारी होता है।

  1. श्राद्ध भोजन को न छुएं

श्राद्ध और पिंडदान के लिए तैयार भोजन पितरों को समर्पित होता है। मान्यता है कि गर्भवती महिला को इसे छूना या खाना नहीं चाहिए। धार्मिक कारणों से दूरी बनाने के साथ-साथ यह मानसिक शांति भी देता है।

  1. पिंडदान स्थलों पर न जाएँ

पितृपक्ष में नदी घाट, पवित्र स्थल या तर्पण स्थल पर भीड़ और धार्मिक गतिविधियां अधिक होती हैं। गर्भवती महिलाओं को वहां जाने से मना किया जाता है ताकि उन्हें संक्रमण, थकान और मानसिक तनाव से बचाया जा सके।

  1. ग्रहण के समय सतर्कता

इस साल पितृपक्ष की शुरुआत और अंत क्रमशः चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण से हो रही है। धार्मिक मान्यता है कि गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। घर में आराम करना, नुकीली वस्तुओं का प्रयोग न करना और गेरू या तुलसी लगाने जैसी परंपराएं इस समय सुरक्षा और मानसिक शांति देती हैं।

  1. ग्रहण से जुड़े मिथक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

धार्मिक मान्यता है कि ग्रहण के समय भोजन करना अशुभ है। नुकीली वस्तुओं (कैंची, चाकू आदि) का प्रयोग करने से गर्भस्थ शिशु पर निशान या दोष पड़ सकता है। खिड़कियाँ और दरवाजे बंद रखना घर की सुरक्षा के लिए जरूरी है। वैज्ञानिक दृष्टि से, ग्रहण के समय घर के अंदर रहना और आराम करना गर्भवती महिलाओं के लिए तनावमुक्त और सुरक्षित माहौल बनाता है।

परंपरागत मान्यताओं और आधुनिक विज्ञान का संतुलन
पितृपक्ष में गर्भवती महिलाओं को जो सावधानियाँ बताई जाती हैं, वे कहीं न कहीं उनके स्वास्थ्य, पाचन और मानसिक संतुलन से जुड़ी होती हैं। तामसिक भोजन से परहेज पाचन को बेहतर बनाता है, भीड़-भाड़ से दूर रहना संक्रमण से बचाता है और ग्रहण के समय घर में रहना आराम व सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

इसलिए, भले ही कई मान्यताएं धार्मिक हों लेकिन उनका पालन करने से गर्भवती महिलाओं को मानसिक सुकून और स्वास्थ्य सुरक्षा दोनों मिलती है।

TAGGED:HealthTipsHinduTraditionPitruPaksha2025PregnancyCareसनातन धर्म
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article पर्स बदलने से पहले करें ये ज़रूरी काम, जानें धन-समृद्धि और स्थिरता के वास्तु टिप्स
Next Article राधा अष्टमी 2025: राधा रानी के जन्मोत्सव पर विशेष पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Your Trusted Source for Accurate and Timely Updates!
Our commitment to accuracy, impartiality, and delivering breaking news as it happens has earned us the trust of a vast audience. Stay ahead with real-time updates on the latest events, trends.
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

vishnuji aur laxmi mata
व्रत और त्योहार

जीवन में शुभता लाती है कामदा एकादशी

By दिव्यसुधा
व्रत और त्योहार

हरतालिका तीज 2025: अखंड सौभाग्य, समर्पण और श्रद्धा का पर्व, जानें तिथि, व्रत विधि और पारण का शुभ समय

By दिव्यसुधा
व्रत और त्योहार

चातुर्मास के शुभ अवसर पर करें ये 5 दान, मिलेगी विष्णु कृपा और सुख-समृद्धि

By दिव्यसुधा
bhagwan vishnu
अन्य

भगवान विष्णु के द्वारपाल, जय विजय की कहानी

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?