हमारा शरीर केवल एक देह नहीं, बल्कि ऊर्जा का मंदिर है और जब हम स्नान करते हैं, तो यह केवल शारीरिक शुद्धि का नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक शुद्धि का भी एक माध्यम होता है। परंतु, क्या आपने कभी सोचा है कि स्नान के बाद की गई कुछ छोटी-छोटी गलतियां आपके जीवन में बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा का कारण बन सकती हैं? वास्तु शास्त्र (Bathing Vastu) में स्नान के बाद की दिनचर्या को बहुत महत्व दिया गया है। चलिए जानते हैं वे कौन-सी भूलें हैं, जिन्हें करने से हमें बचना चाहिए और क्यों…
- स्नान के बाद बाथरूम में पानी इकट्ठा न छोड़ें
जल केवल एक तत्त्व नहीं, बल्कि एक देवता है। जब हम स्नान करते हैं, तो हमारे शरीर से नकारात्मक ऊर्जा जल के माध्यम से बाहर निकलती है। अब यदि वही जल बाथरूम में पड़ा रहता है, तो वह नकारात्मकता पूरे घर में फैल सकती है। वास्तु के अनुसार, गंदा पानी राहु और केतु को क्रोधित करता है। इससे मानसिक तनाव, आर्थिक कष्ट और जीवन में रुकावटें आने लगती हैं। स्नान के बाद बाथरूम को सुखाकर, वहां साफ पानी का छिड़काव करना अत्यंत शुभ माना गया है। - फर्श पर बाल गिराकर छोड़ना
हमारे शरीर से गिरा एक-एक बाल भी ऊर्जा से जुड़ा होता है। नहाते समय बाल झड़ना सामान्य बात है, परंतु उन्हें बाथरूम में ही छोड़ देना बहुत बड़ी गलती है। शास्त्रों में इसे शनि और मंगल का अपमान माना गया है। इससे घर के सदस्यों में आपसी कलह, बीमारियां और नौकरी-धंधे में रुकावटें आती हैं। नहाने के तुरंत बाद बाथरूम की सफाई करना एक सात्त्विक और शुभ आदत है। - गीले कपड़े बाथरूम में न छोड़ें
गीले वस्त्र जल तत्व के अधीन होते हैं और यदि इन्हें अंधेरे, गीले वातावरण में छोड़ दिया जाए, तो वे नकारात्मक ऊर्जा के वाहक बन सकते हैं। इसके साथ-साथ यह आदत स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है, क्योंकि यह बैक्टीरिया और फंगस को जन्म देती है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, हर वस्त्र में हमारी ऊर्जा जुड़ी होती है, इसलिए स्नान के बाद अपने वस्त्रों को धोकर या सुखाकर रखें – यह शरीर और आत्मा दोनों के लिए पवित्रता बनाए रखता है। - स्नान के तुरंत बाद सिंदूर लगाना टालें
स्त्रियों के लिए सिंदूर केवल श्रृंगार नहीं, बल्कि एक दिव्य प्रतीक है – पति की लंबी उम्र, दाम्पत्य सुख और मंगल का प्रतीक। परंतु वास्तु शास्त्र के अनुसार, स्नान के तुरंत बाद सिंदूर लगाना अशुभ माना जाता है। इस समय शरीर की ऊर्जा स्थिर नहीं होती और जल्दबाज़ी में लगाया गया सिंदूर मन की अस्थिरता का परिचायक बन सकता है। इससे दांपत्य जीवन में गलतफहमियां या तनाव उत्पन्न हो सकता है। शुभ यही है कि सिंदूर तब लगाएं जब शरीर और मन दोनों शांत हों। - चप्पल पहनकर न नहाएँ
स्नान एक पवित्र क्रिया है। यह स्वयं को ईश्वर से जोड़ने की एक दैनिक साधना की तरह हो सकती है। ऐसे में अगर हम चप्पल पहनकर स्नान करते हैं, तो यह न केवल शारीरिक रूप से खतरनाक (फिसलने का डर) है, बल्कि यह धरती से जुड़ने की प्रक्रिया को भी बाधित करता है। वास्तु कहता है कि स्नान करते समय पैर सीधे धरती से जुड़े होने चाहिए, ताकि जल तत्व के साथ पृथ्वी का संतुलन भी बना रहे और शरीर की ऊर्जाएं सम्यक प्रवाहित हों। - बाथरूम में नमी बनाए रखना
नहाने के बाद अक्सर लोग बाथरूम का दरवाज़ा बंद कर देते हैं जिससे भीतर नमी बनी रहती है। यह नमी न केवल दीवारों को नुकसान पहुँचाती है, बल्कि फंगस, एलर्जी और साँस की बीमारियों का कारण भी बनती है। वास्तु दृष्टि से, नम वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय रहती है। इसलिए स्नान के बाद बाथरूम को सुखाना, खिड़कियाँ खोलना और वेंटिलेशन बनाए रखना बेहद आवश्यक है। - गीले पैरों के साथ बाहर न निकलें
स्नान के बाद बिना पैर सुखाए बाथरूम से बाहर निकलना न केवल दुर्घटना (फिसलने) की संभावना बढ़ाता है, बल्कि यह फंगल संक्रमण और ठंड-खांसी जैसी बीमारियों का कारण भी बनता है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, जब आप स्नान के बाद साफ-सुथरे और सूखे पैर के साथ बाहर आते हैं, तो आप शुद्धता की ऊर्जा को अपने साथ लेकर घर में प्रवेश करते हैं।
स्नान – केवल शुद्धि नहीं, साधना है
हर दिन का स्नान केवल शरीर धोने की प्रक्रिया न बने, बल्कि वह एक आंतरिक तपस्या हो। आप जिस भाव से स्नान करते हैं, वही भाव आपके दिन भर की ऊर्जा तय करता है। स्नान के बाद की सावधानियाँ आपको केवल बीमारियों से नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक गिरावट से भी बचा सकती हैं। याद रखें – साफ शरीर में साफ मन निवास करता है और साफ मन में ईश्वर।