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दिव्य सुधा > featured > क्या है मौन की शक्ति और ध्यान की सही प्रक्रिया?
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क्या है मौन की शक्ति और ध्यान की सही प्रक्रिया?

दिव्यसुधा
Last updated: August 27, 2025 6:25 pm
दिव्यसुधा
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मौन की शक्ति और ध्यान की सही प्रक्रिया | अध्यात्म से पाएं जीवन की सच्ची शांति
मौन और ध्यान जीवन के हर उत्तर की कुंजी
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जहाँ हम जीवन के हर सवाल का उत्तर अध्यात्म में खोजते हैं। आज की दौड़ती-भागती ज़िंदगी में हम सबने बहुत कुछ पा लिया है – पैसा, नाम, रिश्ते… लेकिन फिर भी मन बेचैन है, नींद अधूरी है और भीतर शक्ति की कमी एक खालीपन है। क्यों? क्योंकि हमने अपने भीतर झाँकना छोड़ दिया है। आज के इस वीडियो में हम बात करेंगे 5 ऐसे आध्यात्मिक विषयों की, जो न सिर्फ आपको सोचने पर मजबूर करेंगे,बल्कि एक नई शुरुआत का रास्ता भी दिखाएंगे।

1-क्या हमारा मन ही हमारा सबसे बड़ा शत्रु है?
गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं मन ही बंधन का कारण है और मोक्ष का भी।हमारा मन दिनभर में लगभग 60 हजार विचार पैदा करता है। ज़्यादातर नकारात्मक। यही विचार हमें डर, चिंता और तनाव की ओर ले जाते हैं। अगर हमने अपने मन को साध लिया, तो कोई भी दुख हमें तोड़ नहीं सकता और यही अध्यात्म का पहला कदम है – मन को जानना और फिर उसे शांत करना।

2- दूसरी चीज ये कि क्या सिर्फ 5 मिनट के आत्म-चिंतन से हमारा जीवन बदल सकता है!
देखिए आत्मचिंतन का मतलब होता है – खुद से सवाल पूछना: मैं किस दिशा में जा रहा हूँ? क्या मैं सच में खुश हूँ? और जो मैं कर रहा हूँ, क्या वो मेरे जीवन का उद्देश्य है? हर दिन सिर्फ 5 मिनट के लिए खुद से जुड़ने का प्रयास करें। एकांत में बैठिए, आंखें बंद कीजिए और अपने विचारों को देखें। यही आत्मचिंतन है – और यही जीवन में संतुलन लाता है।

3-अब सवाल ये है कि क्या क्रोध पर नियंत्रण सच में संभव है?
बिलकुल संभव है। क्रोध, एक क्षणिक आग है जो सबसे पहले हमें ही जलाती है।जब क्रोध आए, तो प्रतिक्रिया देने से पहले 10 सेकंड रुकें। गहरी सांस लें और सबसे ज़रूरी उस स्थिति को एक दर्शक बनकर देखें। ध्यान, मौन और आत्मचिंतन – ये तीनों क्रोध की आग को बुझाने वाले शीतल जल हैं।

4-मौन का रहस्य: जब शब्द नहीं, तब ईश्वर बोलता है
आज हम शोर से घिरे हैं मोबाइल, सोशल मीडिया, टीवी…लेकिन भीतर की आवाज़ तभी सुनाई देती है जब हम बाहर के शोर से दूर होते हैं। मौन केवल बोलना बंद करना नहीं है, बल्कि सोचने का शोर भी शांत करना है। हर दिन 10 मिनट का मौन – आपके भीतर की शक्ति को जाग्रत कर सकता है।

5- ध्यान का सही तरीका: सिर्फ बैठना ही ध्यान नहीं होता!
ध्यान कोई पोज़ नहीं है, ये एक स्थिति है। अगर आप सोचते हैं कि आंखें बंद कर लेना ध्यान है, तो नहीं…ध्यान है – पूरी जागरूकता से वर्तमान में रहना।
-एक शांत जगह पर बैठें
-अपनी सांसों पर ध्यान दें
-जब मन भटके, फिर से सांसों पर लौट आएँ, और यही अभ्यास आपको धीरे-धीरे ध्यान में स्थिर करेगा।

अध्यात्म कोई कठिन साधना नहीं है – ये बस अपने भीतर लौटने की एक सरल प्रक्रिया है। मन को जानिए, मौन में ठहरिए, आत्मचिंतन कीजिए… और देखिए, जीवन में कैसे शांति उतरती है।

TAGGED:AtmachintanenergymeditationMounKiShaktiसनातन धर्म
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