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दिव्य सुधा > अन्य > सावन 2025 की शुरुआत: जानिए क्या करें और क्या नहीं, सावन के नियम और महत्व
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सावन 2025 की शुरुआत: जानिए क्या करें और क्या नहीं, सावन के नियम और महत्व

दिव्यसुधा
Last updated: July 11, 2025 12:42 pm
दिव्यसुधा
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shiv ji
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सावन मास, जिसे श्रावण मास भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग का सबसे आध्यात्मिक, पुण्यदायक और शिव तत्व से भरपूर महीना माना जाता है। यह पूरा महीना भगवान शिव की विशेष आराधना, व्रत, जप और साधना के लिए समर्पित होता है। इस समय प्रकृति हरियाली से जीवन में ऊर्जा भरती है और मनुष्य अपने मन, वचन और कर्म से शिव को प्रसन्न करने का प्रयास करता है। सावन केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं बल्कि आत्म-संयम, सात्त्विक जीवनशैली और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक भी है। श्रद्धा और नियमपूर्वक शिव पूजा करने से व्यक्ति को भगवान शंकर की कृपा, चिंतन में स्थिरता, कर्म में सफलता तथा जीवन में संतुलन प्राप्त होता है।

श्रावण मास में क्या करें –

  • प्रत्येक दिन प्रातःकाल स्नान कर शिव की पूजा करनी चाहिए। शिवलिंग पर बेलपत्र, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से रुद्राभिषेक करें। ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • सावन के सभी सोमवार को उपवास रखें। यह भगवान शिव को विशेष रूप से प्रिय है। सोलह सोमवार का व्रत करने से इच्छित फल की प्राप्ति होती है।
  • सावन में हरी वस्तुओं का प्रयोग करें। महिलाएं हरी चूड़ियां, हरी साड़ी, हरी बिंदी पहनें। हरी सब्जियां, तुलसी और बेलपत्र का सेवन करें।
  • सावन में सात्त्विक आहार लें, जिसमें फलाहार और शुद्ध मसालों का प्रयोग करें। पंचाक्षरी मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
  • ब्राह्मणों और ज़रूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जल पात्र, छाता, गौ सेवा और धार्मिक पुस्तकों का दान करें।
  • कांवड़ियों का स्वागत करें और उन्हें जल, भोजन, विश्राम आदि में सहायता देना अत्यंत पुण्यदायक होता है।
  • रोजाना घर के ईशान कोण में दीपक जलाएं, इससे वातावरण पवित्र होता है और शिव कृपा बनी रहती है।

श्रावण मास में क्या ना करें

  • मांस, अंडा, मदिरा, लहसुन-प्याज जैसी तामसिक वस्तुएं सावन में पूरी तरह वर्जित हैं।
  • क्रोध, झूठ और अपशब्दों से दूर रहें। वाणी पर संयम अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि शिव शांत और सरल हृदय को प्रिय मानते हैं।
  • तुलसी, केतकी और चंपा का फल शिवलिंग पर न चढ़ाएं, ये वर्जित माने गए हैं। टूटा हुआ बेलपत्र भी चढ़ाना अशुभ होता है।
  • लोहे के बर्तन से अभिषेक न करें, तांबा, पीतल या मिट्टी का पात्र प्रयोग करें।
  • रात्रि में व्रत न तोड़ें, पारण सूरज ढलने से पहले करें या अगले दिन ब्रह्म मुहूर्त में।
  • बाल और नाखून न काटें, यह संयम का प्रतीक है। विवादों से बचें, आलोचना न करें और किसी को वाणी का घाव न दें।
  • सावन शिव की आराधना का सबसे उपयुक्त समय है और इस मास में शिव तत्व को अपनाकर हम अपने जीवन में सकारात्मकता, समृद्धि और शांति ला सकते हैं।
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