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दिव्य सुधा > वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा > वास्तु शास्त्र के अनुसार, जानिए कब आउट हाउस बन जाता है दुर्भाग्य का कारण
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

वास्तु शास्त्र के अनुसार, जानिए कब आउट हाउस बन जाता है दुर्भाग्य का कारण

दिव्यसुधा
Last updated: June 20, 2025 5:10 pm
दिव्यसुधा
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आज भी बड़े बंग्लों के पास आउट हाउस देखा जा सकता है। पहले ज़माने में जब घरों के पास काफी खुली जगह होती थी, तब लोग अलग से एक-दो कमरे बनवा लेते थे। ये कमरे आमतौर पर नौकरों के रहने, सामान रखने, मेहमानों के ठहरने या मनोरंजन के लिए इस्तेमाल होते थे। लेकिन अगर आउट हाउस वास्तु के नियमों के खिलाफ बना हो, तो यह घर के लोगों के मान-सम्मान, प्रतिष्ठा और सेहत पर बुरा असर डाल सकता है। वास्तु के अनुसार, आउट हाउस को कभी भी उत्तर या पूर्व दिशा की सीमा से सटाकर नहीं बनाना चाहिए। इन्हें दक्षिण या पश्चिम दिशा की चहारदीवारी के पास बनाना सबसे सही होता है। हालांकि इन कमरों के दरवाजे उत्तर या पूर्व दिशा में होना शुभ माना जाता है। कई बार इन कमरों को वास्तु दोष दूर करने के लिए भी बनाया जाता है।

वास्तुदोष से बचने के लिए अपनाएं ये तरीके

अगर किसी भूखण्ड का विस्तार उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर है और घर उत्तर भाग में बना हुआ है जबकि दक्षिण भाग खाली है, तो वहां वास्तु के अनुसार कुछ सावधानियां जरूरी हैं। ऐसे में यदि नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) कोने में आउट हाउस बनाया जाए, तो उसका फर्श मुख्य मकान के फर्श से ऊंचा होना चाहिए। इससे वास्तु दोष से बचा जा सकता है। साथ ही, इस आउट हाउस के दक्षिण या पश्चिम दिशा में कोई दरवाजा नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे नकारात्मक असर हो सकता है।

अगर किसी भूखण्ड का विस्तार पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर है और मकान पूर्वी भाग में बना है, जबकि पश्चिम हिस्सा खाली है, तो वहां दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) दिशा में आउट हाउस बनाना जरूरी होता है। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो वहां रहने वालों को जीवन में अनचाही परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस आउट हाउस का फर्श मुख्य मकान से ऊंचा होना चाहिए और उसका दरवाजा दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए। इससे वास्तु दोष से बचा जा सकता है।

अगर मकान उत्तर दिशा की चहारदीवारी से सटा हुआ है और दक्षिण दिशा में खाली जगह है, तो उत्तर दिशा का थोड़ा हिस्सा हटाकर दक्षिण दिशा की चहारदीवारी से सटा हुआ आउट हाउस बनाना चाहिए। अगर पूर्व दिशा में बिल्कुल भी खाली जगह नहीं है, तो ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में बने किसी भी निर्माण को हटाना जरूरी होता है। वरना दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) दिशा में बना आउट हाउस असर नहीं करेगा। साथ ही, दक्षिण दिशा की चहारदीवारी में कोई दरवाजा नहीं होना चाहिए। अगर पहले से हो, तो उसे बंद करवा देना चाहिए। इसके अलावा, आउट हाउस के पश्चिम में खुली जगह नहीं छोड़नी चाहिए।

TAGGED:vastu ke niyamvastu secretsvastu shasatravastu tipsसनातन धर्म
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