Thursday, 5 Feb 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > सनातन धर्म > मंदिर > जगन्नाथ मंदिर में प्रेमी जोड़ों का प्रवेश वर्जित, राधारानी के श्राप से जुड़ी रहस्यमयी परंपरा
मंदिर

जगन्नाथ मंदिर में प्रेमी जोड़ों का प्रवेश वर्जित, राधारानी के श्राप से जुड़ी रहस्यमयी परंपरा

दिव्यसुधा
Last updated: June 21, 2025 3:46 pm
दिव्यसुधा
Share
SHARE

पुरी का जगन्नाथ मंदिर केवल आस्था का नहीं, बल्कि परंपराओं और रहस्यों का भी केंद्र है। हर साल यहां की रथ यात्रा में लाखों लोग शामिल होते हैं, लेकिन अविवाहित प्रेमी जोड़ों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं होती। इसके पीछे एक पौराणिक मान्यता है कि राधारानी ने भगवान कृष्ण को श्राप दिया था, जिसके चलते यह परंपरा आज भी निभाई जाती है। यह मंदिर कई ऐसे रहस्यों से जुड़ा है जो विज्ञान को भी हैरान कर देते हैं।

ओडिशा के समुद्र तट पर बसे पुरी शहर में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर आस्था, परंपराओं और सनातन संस्कृति का अनोखा संगम है। हर साल यहां जगन्नाथ रथ यात्रा होती है, जो केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। इस वर्ष रथ यात्रा 27 जून 2025 से शुरू हो रही है, जिसमें लाखों भक्त शामिल होने पुरी आएंगे।

रथ यात्रा सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि एक गहरी धार्मिक भावना है। इसमें भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथों में सवार होकर नगर भ्रमण करते हैं। यह यात्रा आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होती है और लाखों श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं। लेकिन इसी मंदिर से जुड़ी एक खास परंपरा है कि अविवाहित प्रेमी जोड़ों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती, जो अक्सर चर्चा में रहती है।

अविवाहित जोड़ों का प्रवेश है वर्जित

पुरी के जगन्नाथ मंदिर में अविवाहित प्रेमी जोड़ों का प्रवेश वर्जित है, और यह परंपरा एक पौराणिक कथा से जुड़ी है। कहा जाता है कि एक बार राधारानी भगवान श्रीकृष्ण के जगन्नाथ रूप के दर्शन के लिए पुरी आईं, लेकिन पुजारियों ने उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया क्योंकि वे कृष्ण की पत्नी नहीं, बल्कि प्रेमिका थीं। इस अपमान से आहत होकर राधारानी ने क्रोधित होकर श्राप दिया कि जो भी अविवाहित प्रेमी जोड़ा मंदिर में प्रवेश करेगा, उसे अपने प्रेम में सफलता नहीं मिलेगी। तभी से यह मान्यता बनी हुई है और मंदिर प्रशासन इस परंपरा का सख्ती से पालन करता है। यह कथा आज भी श्रद्धालुओं के बीच आस्था का विषय है।

पुरी के जगन्नाथ मंदिर में अविवाहित प्रेमी जोड़ों का प्रवेश एक पौराणिक श्राप के कारण वर्जित है। यहां तक कि वे जोड़े भी, जिनकी शादी तय हो चुकी हो लेकिन विवाह नहीं हुआ हो, मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते। यह नियम प्रेम के खिलाफ नहीं है, बल्कि मंदिर की पवित्रता और धार्मिक मर्यादा बनाए रखने के लिए है। मंदिर के सेवायत और प्रशासन श्रद्धालुओं से इस परंपरा के सम्मान की अपेक्षा रखते हैं। भगवान श्रीकृष्ण प्रेम के प्रतीक हैं, फिर भी यह परंपरा उनकी आध्यात्मिक मर्यादा और धार्मिक अनुशासन का प्रतीक मानी जाती है।

जगन्नाथ पुरी मंदिर, रहस्यों और चमत्कारों का अद्भुत संगम

पुरी के जगन्नाथ मंदिर में कई रहस्य हैं। मंदिर के अंदर जाने पर समुद्र की लहरों की आवाज बंद हो जाती है, और बाहर आते ही फिर से सुनाई देती है। यह वैज्ञानिक रूप से समझ नहीं पाया है। मंदिर की छाया भी दिन में कभी जमीन पर नहीं पड़ती, चाहे सूरज की दिशा कोई भी हो। ये अनोखी बातें इसे सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि चमत्कारिक भी बनाती हैं।

TAGGED:जगन्नाथ पुरी मंदिरजगन्नाथ मंदिरभगवान कृष्ण को श्रापराधारानी के श्राप
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article मां आदि शक्ति की आरती, जय अम्बे गौरी… यहां पढ़िए पूरी आरती
Next Article शनिवार को पहनें ये शुभ रंग, बरसेगी शनि देव की विशेष कृपा
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

kali mata mandir
मंदिर

चंदौली में स्थित महाकाली मंदिर

By दिव्यसुधा
श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, केरल – भगवान विष्णु का मंदिर और रहस्यमयी खजाना
मंदिर

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर: रहस्यमयी खजाने की अद्भुत कथा

By दिव्यसुधा
कनिपकम विनायक मंदिर की स्वयंभू और बढ़ती हुई भगवान गणेश प्रतिमा – आंध्र प्रदेश का अद्भुत चमत्कार
मंदिर

कनिपकम विनायक मंदिर – जहां भगवान गणेश की प्रतिमा हर साल बढ़ती जाती है

By दिव्यसुधा
kedar nath ke rahsy
मंदिर

6 महीने तक कौन करता है केदारनाथ में पूजा? जानिए रहस्य

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?