ओडिशा की पुरी धाम में भगवान जगन्नाथ यात्रा की तैयरी बहुत जोरों-शोरों से चल रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा निकाली जाती है। वहीं आज यानी जेष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि के दिन भगवान जगन्नाथ को स्नान कराया जायेगा। इसके पश्चात भगवान जगन्नाथ 15 दिनों के लिए बीमार होने के बाद एकांतवास में चले जाते हैं। इस दौरान भक्तगण भगवान के दर्शन नहीं कर पाते। जब भगवान पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं, तब उनकी रथ यात्रा शुरू होती है। इस परंपरा का पालन हर साल बड़े श्रद्धा और धूमधाम से किया जाता है।
108 घड़ों के पानी से होगा भगवान जगन्नाथ का स्नान
आज भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र की मूर्तियों को मंदिर के गर्भगृह से मंडप में लाया जाएगा। वहां 108 घड़ों के पानी से उनका पवित्र स्नान कराया जाएगा। परंपरा के अनुसार, भगवान जगन्नाथ को 35 घड़े, देवी सुभद्रा को 22 घड़े, भगवान बलभद्र को 33 घड़े और भगवान सुदर्शन को 18 घड़े पानी से स्नान करवाया जाता है। खास बात ये है कि इस घड़े के पानी में कई प्रकार की औषधियां मिलाई जाती है। सुगंधित फूल, चंदन, केसर,कस्तूरी को पानी में मिलाया जाता है। इस पवित्र स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन को बुखार होने जैसा अनुभव होता है। यह रिवाज बड़े श्रद्धा और भक्ति के साथ निभाया जाता है।
कब शुरू हो रही है जगन्नाथ यात्रा
इस साल भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की शुरुआत शुक्रवार, 27 जून 2025 को होगी। इस दिन भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक यात्रा करेंगे। हर साल की तरह इस बार भी लाखों भक्त रथ यात्रा में भाग लेने के लिए पुरी धाम पहुंचेंगे। यह यात्रा भक्ति और उत्साह से भरपूर होती है। इस रथ यात्रा का समापन शनिवार, 5 जुलाई 2025 को होगा।