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दिव्य सुधा > सनातन धर्म > मंदिर > मैहर धाम : माता शारदा देवी मंदिर
मंदिर

मैहर धाम : माता शारदा देवी मंदिर

दिव्यसुधा
Last updated: April 25, 2025 9:45 am
दिव्यसुधा
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मैहर धाम
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मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में मैहर की माता शारदा का एक प्रसिद्द मंदिर है यह मंदिर की धार्मिक आस्था का बहुत ही पवित्र और प्रसिद्ध स्थान है। यह मंदिर त्रिचूट पर्वत पर 600 फिट की ऊंचाई पर मौजूद है जहां तक पहुंचने के लिए 1063 सीढ़िया चढ़नी पड़ती है।  

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, 51 शक्तिपीठों में एक मां शारदा का पावन धाम मध्य प्रदेश के मैहर में त्रिकूट पर्वत की ऊंची चोटी पर स्थित है, मान्यता है कि यहां पर सती का हार गिरा था, मैहर में माता का हार गिरने से इस जगह को मैहर कहा जाता है। इस मंदिर कि गणना शक्तिपीठों में की जाती है।  पुरे भारत  में  सतना का मैहर मंदिर माता शारदा अकेला मंदिर है। यहां पर  माता  भव्य और सुंदर भवन में विराजमान हैं पहाड़ की चोटी पर स्थित मैहर देवी का यह मंदिर अपने चमत्कारों के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है। मैहर वाली मां शारदा के महज दर्शन मात्र से ही भक्तों के सभी दु:ख दूर हो जाते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी हेाती हैं।  

कहा जाता है की प्राचीन समय में मैहर मंदिर की खोज आल्हा और उदल नामक 2 भाइयों ने की थी जो की दोनों बहुत बड़े योद्धा थे। जो अपनी वीरता के लिए पूरे भारत में जाने जाते थे। आल्हा ने घने जंगलों में इस मंदिर की खोज करने के बाद 12 सालों तक अटूट तपस्या की थी। तब देवी माँ इनके ऊपर प्रसन्न होकर इनको  अपने दैवीय रूप के दर्शन दिए थे और इनके भक्ति से प्रसन्न होकर अमर होने का वरदान दिया तब से ऐसा माना जाता है कि आल्हा और उदल अमर हो गए। मन यह भी जाता है की मैहर माता को प्रसन्न करने के लिए दोनों भाइयों ने भक्ति भाव से अपनी जीभ माँ शारदा को अर्पण कर दी थी, जिसे मां शारदा ने उसी क्षण वापस कर दिया था।  

कहा जाता है कि आज भी आल्हा अदृश्य रूप से आकर शारदा मां की पूजा और पहला श्रृंगार करते हैं। लोगो की माने तो आज भी रात ८ बजे आरती के बाद साफ-सफाई होती है और मंदिर के सभी कपाट बंद कर दिए जाते है। इसके बावजूद जब जब ब्रह्म मुहूर्त में मां शारदा मंदिर के पट खोले जाते हैं तो पूजा और आरती की हुई मिलती है जो की मैहर मंदिर का रहस्य है आज भी यही मान्यता है कि माँ शारदा के दर्शन हर सुबह सबसे पहले आल्हा और रुदल ही करते है। इस  मैहर मंदिर का रहस्य, जिसको आज तक वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए।

 सनातन परंपरा में मां शारदा को विद्या, बुद्धि और कला की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजा जाता है। किसी भी परीक्षा-प्रतियोगिता की तैयारी में जुटे छात्र मां शारदा का विशेष आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बड़ी संख्या में यहां पर पहुंचते हैं। मां शारदा की सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्त को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उसकी कभी भी अकाल मृत्यु नहीं होती।  मां शारदा की कृपा से वह हमेशा तमाम प्रकार के भय, रोग आदि तमाम प्रकार की व्याधियों से भी बचा रहता है।

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