Sunday, 31 Aug 2025
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > अन्य > शिव पुराण हिंदी में
अन्य

शिव पुराण हिंदी में

दिव्यसुधा
Last updated: April 22, 2025 12:39 pm
दिव्यसुधा
Share
शिव पुराण
SHARE

शिव पुराण सभी पुराणों में सबसे महत्वपूर्ण और सबसे ज़्यादा पढ़ी जाने वाली पुराणों में से एक है। इसमें भगवान शिव के विभिन्न रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और उनकी भक्ति का सुंदर और विस्तार से वर्णन किया गया है। इस पुराण में शिव के कल्याणकारी रूप, उनके गहरे रहस्यों, और पूजा-पद्धति की जानकारी दी गई है। शिव पुराण में शिव को पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है। शिव-महिमा, लीला-कथाओं के अतिरिक्त इसमें पूजा-पद्धति, अनेक ज्ञानप्रद आख्यान और शिक्षाप्रद कथाओं का सुन्दर संयोजन है। इसमें भगवान शिव के भव्यतम व्यक्तित्व का गुणगान किया गया है। शिव- जो स्वयंभू हैं, शाश्वत हैं, सर्वोच्च सत्ता है, विश्व चेतना हैं और ब्रह्माण्डीय अस्तित्व के आधार हैं।

‘शिव पुराण’ का सम्बन्ध शैव मत से है। शिव पुराण में न सिर्फ भगवान शिव की महिमा का बखान किया गया है, बल्कि इसमें शिक्षाप्रद कथाएं, धार्मिक आख्यान, और भक्ति के तरीके भी बताए गए हैं। यह पुराण हमें यह भी सिखाता है कि शिव कितने सरल और दयालु हैं, जो थोड़ी सी भक्ति से भी जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों को मनचाहा फल देते हैं। इसमें भगवान शिव के जीवन चरित्र, जैसे उनका विवाह (पार्वती से), उनके पुत्रों (जैसे कार्तिकेय और गणेश) की उत्पत्ति और उनके सादा जीवन और रहन-सहन का भी वर्णन किया गया है।

शिव पुराण में 24000 श्लोक है तथा इसके क्रमश: 6 खण्ड है

विद्येश्वर संहिता
रुद्र संहिता
कोटिरुद्र संहिता
कैलास संहिता
वायु संहिता

‘शिवपुराण’ हिंदू धर्म एक प्रमुख तथा प्रसिद्ध ग्रंथ है, इसमें भगवान शिव के कल्याणकारी स्वरूप, उनकी महिमा, रहस्य, और भक्ति की विधियों का विस्तृत और गहराई से वर्णन किया गया है। भगवान शिव सिर्फ एक पौराणिक देवता नहीं हैं, बल्कि वे पंचदेवों में प्रमुख, अनादि (जिसका कोई आरंभ नहीं), और सिद्ध परमेश्वर माने गए हैं। वेद और उपनिषद जैसे प्राचीन ग्रंथों ने भी शिव को स्वयंभू, शांत, सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता और संहारक कहा है।एवं निगमागम आदि सभी शास्त्रों में महिमामण्डित महादेव हैं। वेदों ने इस परमतत्त्व को अव्यक्त, अजन्मा, सबका कारण, विश्वपंच का स्रष्टा, पालक एवं संहारक कहकर उनका गुणगान किया है। श्रुतियों ने सदा शिव को स्वयम्भू, शान्त, प्रपंचातीत, परात्पर, परमतत्त्व, ईश्वरों के भी परम महेश्वर कहकर स्तुति की है। ‘शिव’ का अर्थ ही है- ‘ कल्याणस्वरूप’ और ‘कल्याणप्रदाता’’। परमब्रह्म के इस कल्याण रूप की उपासना उटच्च कोटि के सिद्धों, आत्मकल्याणकामी साधकों एवं सर्वसाधारण आस्तिक जनों-सभी के लिये परम मंगलमय, परम कल्याणकारी, सर्वसिद्धिदायक और सर्वश्रेयस्कर है। शास्त्रों में कहा गया है कि देवता, दानव, ऋषि, मुनि, यहाँ तक कि ब्रह्मा और विष्णु भी शिव की उपासना करते हैं। यह दिखाता है कि शिव का स्थान सर्वोच्च है। इस पुराण के अनुसार यह पुराण परम उत्तम शास्त्र है। इसे इस भूतल पर शिवपुराण को भगवान शिव का वाणी स्वरूप माना गया है। इसका पढ़ना, सुनना और मनन करना बहुत पुण्यदायी है। इससे शिव भक्ति पाकर श्रेष्ठतम स्थिति में पहुँचा हुआ मनुष्य शीघ्र ही शिवपद को प्राप्त कर लेता है। इसलिये सम्पूर्ण यत्न करके मनुष्यों ने इस पुराण को पढ़ने की इच्छा की है- अथवा इसके अध्ययन को अभीष्ट साधन माना है। इसी तरह इसका प्रेमपूर्वक श्रवण भी सम्पूर्ण मनोवंछित फलों के देनेवाला है। भगवान शिव के इस पुराण को सुनने से व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो जाता है तथा इस जीवन में बड़े-बड़े उत्कृष्ट भोगों का उपभोग करके अन्त में शिवलोक को प्राप्त कर लेता है। यह शिवपुराण नामक ग्रन्थ चौबीस हजार श्लोकों से युक्त है। सात संहिताओं से युक्त यह दिव्य शिवपुराण परब्रह्म परमात्मा के समान विराजमान है और सबसे उत्कृष्ट गति प्रदान करने वाला है। इसलिए इस पुराण का अध्ययन और श्रवण करना हर शिवभक्त के लिए जरूरी और फायदेमंद माना गया है।

शिवपुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह भगवान शिव की महिमा, रहस्य और भक्ति का अमूल्य खजाना है। यह ग्रंथ हमें बताता है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास से शिव की भक्ति करने वाला व्यक्ति जीवन के हर मोड़ पर सफलता और कल्याण प्राप्त करता है।

TAGGED:humare bhgwanpuranshiv puranसनातन धर्म
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article shami aur mandar धार्मिक आस्था के प्रतीक: शमी और मंदार वृक्ष
Next Article श्रीपुरम स्वर्ण मंदिर श्रीपुरम स्वर्ण मंदिर, 100 एकड़ में बनी स्वर्ण से सजा श्री लक्ष्मी नारायणी धाम
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Your Trusted Source for Accurate and Timely Updates!
Our commitment to accuracy, impartiality, and delivering breaking news as it happens has earned us the trust of a vast audience. Stay ahead with real-time updates on the latest events, trends.
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

rashifal
राशिफल

28 मई 2025 राशिफल: सितारे क्या कहते हैं आपके आज के दिन के बारे में

By दिव्यसुधा
featuredपंचांग

आज का पंचाग: 31 जुलाई 2025

By दिव्यसुधा
अन्य

Diverse Opinions That Ignite Conversations and Reshape Perceptions

By दिव्यसुधा
featuredपंचांग

आज का पंचाग: 30 जुलाई 2025

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?