Wednesday, 28 Oct 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > सनातन धर्म > भगवान > हनुमान जी के संगीत का रहस्य: कैसे दूर किया नारद मुनि का अहंकार?
भगवानसनातन धर्म

हनुमान जी के संगीत का रहस्य: कैसे दूर किया नारद मुनि का अहंकार?

दिव्यसुधा
Last updated: October 26, 2026 8:12 pm
दिव्यसुधा
Share
हनुमान जी और नारद मुनि के संगीत तथा अहंकार से जुड़ी पौराणिक कथा
हनुमान जी के संगीत ने कैसे दूर किया नारद मुनि का अहंकार? जानिए इस लोकप्रिय धार्मिक कथा से मिलने वाली सीख।
SHARE

भारतीय पौराणिक कथाओं में भगवान हनुमान की भक्ति, शक्ति और विनम्रता के अनेक प्रसंग मिलते हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति में अहंकार के लिए कोई स्थान नहीं होता। हनुमान जी केवल श्रीराम के परम भक्त ही नहीं, बल्कि संगीत और भक्ति के अद्भुत भाव से भी जुड़े हुए माने जाते हैं। उनसे संबंधित एक प्रचलित कथा में संगीत की ऐसी शक्ति का वर्णन मिलता है, जिसने नारद मुनि के अहंकार को चुनौती दी और उन्हें विनम्रता का महत्व समझाया।

Contents
नारद मुनि को था अपनी संगीत कला पर गर्वजब हनुमान जी के सामने पहुंच गए नारद मुनिहनुमान जी के संगीत से पिघलने लगा पत्थरजब अपने संगीत से वीणा नहीं निकाल पाए नारद मुनिहनुमान जी ने दिया विनम्रता का संदेशइस कथा से क्या सीख मिलती है?

नारद मुनि को देवर्षि कहा जाता है। वे भगवान विष्णु के परम भक्त और वीणा के माध्यम से भगवान का गुणगान करने वाले दिव्य ऋषि माने जाते हैं। उनकी वीणा का नाम महती बताया गया है। संगीत और भक्ति में अपनी निपुणता के कारण यदि उनके मन में श्रेष्ठता का भाव उत्पन्न हुआ, तो हनुमान जी के संगीत ने उन्हें यह समझाने का माध्यम प्रदान किया कि कला की वास्तविक सुंदरता अहंकार में नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति समर्पण में है।

नारद मुनि को था अपनी संगीत कला पर गर्व

पौराणिक कथा के प्रचलित रूप के अनुसार, नारद मुनि अपनी वीणा और संगीत कला में अत्यंत निपुण थे। वे अपनी वीणा बजाते हुए भगवान विष्णु और अन्य देवी-देवताओं की स्तुति किया करते थे। एक दिन उनके मन में यह विचार आया कि उनसे बड़ा संगीतज्ञ शायद ही कोई हो। संगीत के प्रति उनकी निपुणता धीरे-धीरे गर्व का कारण बनने लगी।

नारद मुनि को यह एहसास नहीं था कि कला कितनी भी महान क्यों न हो, जब उसमें अहंकार आ जाता है, तो उसकी सुंदरता कम होने लगती है। भगवान की भक्ति में विनम्रता का विशेष महत्व है। इसी बात का अनुभव कराने के लिए हनुमान जी से जुड़ी यह कथा सुनाई जाती है।

जब हनुमान जी के सामने पहुंच गए नारद मुनि

कथा के अनुसार, एक दिन नारद मुनि की भेंट हनुमान जी से हुई। नारद मुनि को लगा कि वे अपने संगीत से हनुमान जी को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, हनुमान जी का मन सदैव भगवान श्रीराम की भक्ति में लीन रहता था।

हनुमान जी के लिए संगीत केवल कला का प्रदर्शन नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के प्रति प्रेम व्यक्त करने का माध्यम था। उनके हृदय में अपने संगीत को लेकर न तो कोई अभिमान था और न ही किसी को छोटा दिखाने की भावना।

कथा के एक प्रचलित रूप में भगवान विष्णु की उपस्थिति में नारद मुनि अपनी संगीत कला का प्रदर्शन करते हैं। इसके बाद हनुमान जी को भी गाने के लिए कहा जाता है। नारद मुनि को आश्चर्य होता है कि एक वानर भी संगीत में इतनी निपुणता कैसे दिखा सकता

हनुमान जी के संगीत से पिघलने लगा पत्थर

कथा का सबसे अद्भुत प्रसंग तब आता है, जब हनुमान जी भगवान श्रीराम का स्मरण करते हुए संगीत प्रस्तुत करने लगते हैं। उनके गायन में ऐसी तन्मयता और भक्ति का वर्णन मिलता है कि वहां उपस्थित लोग मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

कहते हैं कि हनुमान जी के संगीत के प्रभाव से पास रखा एक पत्थर पिघलने लगा। नारद मुनि अपनी वीणा एक शिला पर रखकर संगीत सुनने में इतने लीन हो गए कि उन्हें आसपास की स्थिति का ध्यान ही नहीं रहा। धीरे-धीरे वीणा पिघलती हुई शिला में धंस गई।

जब हनुमान जी ने गाना बंद किया, तो शिला फिर से कठोर हो गई और नारद मुनि की वीणा उसमें फंस गई। नारद मुनि ने वीणा को निकालने का प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हो सके।

अब उनके सामने एक ऐसी परिस्थिति थी, जिसमें केवल अपनी संगीत कला का गर्व करना पर्याप्त नहीं था। उन्हें उस संगीत की शक्ति को समझना था, जो पूर्ण समर्पण और भक्ति के भाव से उत्पन्न हुआ था। यह प्रसंग हनुमान जी से जुड़ी एक प्रचलित धार्मिक कथा के रूप में सुनाया जाता है।

जब अपने संगीत से वीणा नहीं निकाल पाए नारद मुनि

अपनी वीणा को पत्थर में फंसा देखकर नारद मुनि ने हनुमान जी से उसे निकालने का अनुरोध किया। हनुमान जी ने उन्हें स्वयं संगीत प्रस्तुत करके वीणा निकालने का प्रयास करने के लिए कहा।

नारद मुनि ने अपनी पूरी कला का प्रयोग किया। उन्होंने वीणा बजाई और गाने का प्रयास किया, लेकिन शिला नहीं पिघली। उनकी वीणा वहीं फंसी रही। जिस संगीत कला पर उन्हें गर्व था, वह उस समय उनके काम नहीं आ सकी।

इसके बाद हनुमान जी ने फिर से भगवान श्रीराम का स्मरण करते हुए संगीत प्रस्तुत किया। कथा के अनुसार, शिला दोबारा पिघलने लगी और नारद मुनि अपनी वीणा निकालने में सफल हो गए।

यह देखकर नारद मुनि समझ गए कि संगीत की महानता केवल सुर, ताल और तकनीक में नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे भाव और समर्पण में भी है। उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ और उनका अहंकार दूर हो

हनुमान जी ने दिया विनम्रता का संदेश

इस प्रसंग में हनुमान जी ने नारद मुनि को नीचा दिखाने का प्रयास नहीं किया। उन्होंने अपने आचरण और संगीत के माध्यम से उन्हें एक महत्वपूर्ण बात समझाई। सच्ची कला वही है, जिसमें अहंकार की जगह विनम्रता और प्रदर्शन की जगह समर्पण हो।

हनुमान जी की सबसे बड़ी विशेषता यही मानी जाती है कि अपार शक्ति, ज्ञान और सामर्थ्य होने के बाद भी वे स्वयं को भगवान श्रीराम का सेवक मानते हैं। उनकी भक्ति हमें बताती है कि जीवन में चाहे कितनी भी सफलता क्यों न मिल जाए, अपने भीतर विनम्रता बनाए रखना आवश्यक है।

नारद मुनि का यह प्रसंग भी इसी सीख को सामने रखता है कि ज्ञान और प्रतिभा का वास्तविक मूल्य तभी है, जब उनके साथ विवेक और विनम्रता भी हो।

इस कथा से क्या सीख मिलती है?

हनुमान जी और नारद मुनि से जुड़ी यह लोकप्रिय कथा हमें तीन महत्वपूर्ण बातें सिखाती है।

  • अहंकार से बचें: अपनी प्रतिभा पर विश्वास करना अच्छा है, लेकिन स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ समझना उचित नहीं।
  • भाव का महत्व समझें: भक्ति में बाहरी प्रदर्शन से अधिक महत्व सच्चे मन और समर्पण का होता है।
  • विनम्रता बनाए रखें: ज्ञान, कला और सफलता मिलने के बाद भी दूसरों का सम्मान करना चाहिए।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि पत्थर पिघलने और वीणा फंसने का यह प्रसंग लोकप्रिय धार्मिक कथा-परंपरा में मिलता है। इसके अलग-अलग संस्करण प्रचलित हैं, इसलिए इसे सभी प्राचीन ग्रंथों में समान रूप से वर्णित प्रसंग नहीं मानना चाहिए।

अंततः हनुमान जी के संगीत का रहस्य केवल चमत्कार में नहीं, बल्कि उस भक्ति भाव में छिपा है, जो उन्हें भगवान श्रीराम से जोड़ता है। यह कथा याद दिलाती है कि जब प्रतिभा के साथ विनम्रता और हृदय में सच्ची भक्ति हो, तभी जीवन की उपलब्धियां वास्तविक अर्थ प्राप्त करती हैं।

TAGGED:Bhakti StoriesDevotional StoriesDivyaSudhahanuman jiHanuman Ji StoryHanuman Music Storyhindu mythologyHindu Religious StoriesIndian MythologyLord HanumanMythological StoriesNarad MuniNarada Muni StoryRam BhaktiSanatan DharmaSpiritual Wisdom
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article 28 अक्टूबर 2026 का दैनिक राशिफल, मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का भविष्यफल 27 अक्टूबर 2026 का राशिफल: मेष से मीन तक जानें सभी 12 राशियों का भविष्यफल
Next Article करवा चौथ पर माता गौरी की पूजा करती महिला और पूजा की थाली में रखा मिट्टी का करवा जिनकी होती है पूजा, आखिर कौन हैं वो ‘करवा माता’? व्रत से पहले जरूर पढ़ें अनसुना रहस्य
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

घर में सुख-समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा से जुड़े सात शुभ संकेत
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

घर में दिखें ये 7 संकेत, माना जाता है मां लक्ष्मी की कृपा का संकेत

By दिव्यसुधा
माता सती और भगवान शिव की 51 शक्तिपीठों की कथा का चित्रण, जिसमें भक्त देवी की शक्ति का अनुभव कर रहे हैं।
मंदिर

51 शक्तिपीठों की कथा: प्रेम, त्याग और असीम शक्ति

By दिव्यसुधा
मंदिरसनातन धर्म

संगम किनारे क्यों मिलती है लेटे हुए हनुमान जी की प्रतिमा? जानिए पौराणिक कथा का रहस्य

By दिव्यसुधा
भगवान विष्णु, लक्ष्मी और गणेश पूजा के साथ बरगद के पत्ते का धार्मिक महत्व दर्शाती तस्वीर
अन्य

पूजा में क्यों नहीं चढ़ाया जाता बरगद का पत्ता? जानें धार्मिक नियम और मान्यताएं

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?