दूर्वा गणपति चतुर्थी 2026 इस बार 16 अगस्त, रविवार को मनाई जाएगी। सावन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाने वाली इस तिथि को सावन विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख, समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद मिलता है। इस वर्ष दूर्वा गणपति चतुर्थी विशेष मानी जा रही है, क्योंकि इस दिन 5 शुभ योग बन रहे हैं। साथ ही गणेश पूजा के लिए 2 घंटे 38 मिनट का विशेष शुभ मुहूर्त प्राप्त होगा। हालांकि, चतुर्थी व्रत के दौरान चंद्रमा का दर्शन करना वर्जित माना गया है।
दूर्वा गणपति चतुर्थी 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 15 अगस्त 2026 को शाम 5:28 बजे शुरू होगी और 16 अगस्त को शाम 4:52 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार, दूर्वा गणपति चतुर्थी का व्रत 16 अगस्त, रविवार को रखा जाएगा।
दूर्वा गणपति चतुर्थी पर बनेंगे 5 शुभ योग
इस बार चतुर्थी तिथि पर सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, रवि योग, साध्य योग और शुभ योग का संयोग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग सुबह 5:51 बजे से शुरू होकर 17 अगस्त को तड़के 3:50 बजे तक रहेंगे। साध्य योग भी चतुर्थी के दिन प्रातःकाल से 17 अगस्त को सुबह 4:08 बजे तक रहेगा, जिसके बाद शुभ योग बनेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए शुभ कार्यों में सफलता मिलने की संभावना रहती है, जबकि रवि योग को दोषों और नकारात्मक प्रभावों को दूर करने वाला माना जाता है। इस दिन हस्त नक्षत्र का भी प्रभाव रहेगा। चंद्रमा कन्या राशि और सूर्य कर्क राशि में स्थित रहेंगे।
दूर्वा गणपति चतुर्थी 2026 पूजा मुहूर्त
व्रत रखने वाले भक्तों के लिए भगवान गणेश की पूजा का शुभ समय सुबह 11:06 बजे से दोपहर 1:44 बजे तक रहेगा। इस दौरान गणपति बप्पा की विधिवत पूजा करें और उन्हें दूर्वा, मोदक, फल तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। वहीं, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:24 बजे से 5:07 बजे तक रहेगा। स्नान, ध्यान और आध्यात्मिक साधना के लिए यह समय शुभ माना जाता है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक रहेगा, जबकि निशिता मुहूर्त रात 12:04 बजे से 12:47 बजे तक रहेगा।
चतुर्थी पर चंद्र दर्शन क्यों वर्जित है?
विनायक चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना धार्मिक रूप से वर्जित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति पर झूठे आरोप या मिथ्या कलंक लगने की आशंका रहती है। पंचांग के अनुसार, इस दिन चंद्रोदय सुबह 9:23 बजे और चंद्रास्त रात 9:02 बजे होगा। इसलिए इस अवधि में लगभग 11 घंटे 40 मिनट तक चंद्रमा के दर्शन से बचना चाहिए।
दूर्वा गणपति चतुर्थी का धार्मिक महत्व
दूर्वा गणपति चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा और व्रत को विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि गणपति बप्पा की आराधना करने से जीवन के दुख, कष्ट, दरिद्रता और नकारात्मकता दूर होती है। गणेश जी को दूर्वा अर्पित करने से वे प्रसन्न होते हैं और भक्तों को बुद्धि, सफलता, सुख-समृद्धि तथा शुभता का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखें, गणेश मंत्रों का जाप करें और पूजा के बाद जरूरतमंदों को दान देकर भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करें।