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दिव्य सुधा > अन्य > कालाष्टमी 2026: सही तिथि, व्रत का महत्व, काल भैरव पूजा विधि और प्रभावी उपाय
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कालाष्टमी 2026: सही तिथि, व्रत का महत्व, काल भैरव पूजा विधि और प्रभावी उपाय

दिव्यसुधा
Last updated: August 5, 2026 11:44 am
दिव्यसुधा
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कालाष्टमी 2026 पर भगवान काल भैरव की पूजा करते श्रद्धालु, सरसों के तेल का दीपक और पूजा सामग्री के साथ।
कालाष्टमी पर भगवान काल भैरव की पूजा करने से भय, नकारात्मक ऊर्जा और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलने की धार्मिक मान्यता है।
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हिंदू धर्म में प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का पावन पर्व मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र एवं रक्षक स्वरूप भगवान काल भैरव को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से काल भैरव की पूजा, व्रत, मंत्र जाप और विशेष उपाय करने से भय, नकारात्मक ऊर्जा, आर्थिक संकट, रोग-बाधा और जीवन की परेशानियों से राहत मिलती है। साथ ही यह दिन तंत्र साधना और आध्यात्मिक साधना के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है।

कालाष्टमी 2026 की सही तिथि
पंचांग के अनुसार, सावन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 5 अगस्त 2026 को शाम 8:42 बजे शुरू होगी और 6 अगस्त 2026 को शाम 6:52 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार सावन कालाष्टमी का व्रत 6 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

कालाष्टमी व्रत का धार्मिक महत्व
भगवान काल भैरव को समय, न्याय और सुरक्षा का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि कालाष्टमी के दिन उनकी आराधना करने से जीवन के कष्ट, भय, शत्रु बाधा और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है। इस दिन भगवान शिव और काल भैरव की कृपा प्राप्त करने से साहस, आत्मविश्वास, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति का आशीर्वाद मिलता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कालाष्टमी पर किए गए उपाय राहु दोष और अन्य ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने में भी सहायक माने जाते हैं।

कालाष्टमी के दिन करें ये आसान और प्रभावी उपाय

आर्थिक संकट दूर करने के लिए
यदि धन संबंधी परेशानियां बनी हुई हैं, तो काल भैरव के समक्ष मिट्टी के दीपक में सरसों के तेल का दीपक जलाएं और श्रद्धापूर्वक “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ” मंत्र का जाप करें। धार्मिक मान्यता है कि इससे आर्थिक बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।

परिवार में सुख-शांति के लिए
यदि घर में बार-बार विवाद या तनाव रहता है, तो स्नान के बाद भगवान शिव की प्रतिमा के सामने बैठकर शिव चालीसा का पाठ करें। इससे घर का वातावरण सकारात्मक होता है और भगवान काल भैरव की कृपा से परिवार में प्रेम, शांति और सौहार्द बना रहता है।

अच्छे स्वास्थ्य के लिए
यदि लंबे समय से बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं परेशान कर रही हैं, तो कालाष्टमी के दिन काल भैरव का स्मरण करते हुए काले कुत्ते को सरसों के तेल लगी रोटी खिलाएं। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से स्वास्थ्य लाभ और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

कालाष्टमी भगवान काल भैरव की कृपा प्राप्त करने का अत्यंत शुभ अवसर है। इस दिन श्रद्धा, भक्ति, मंत्र जाप, दान और सेवा भाव के साथ की गई पूजा जीवन में सुख, समृद्धि, साहस और मानसिक शांति का मार्ग प्रशस्त करती है। यदि आप भगवान काल भैरव का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो कालाष्टमी के दिन पूरे विश्वास और विधि-विधान से उनकी आराधना अवश्य करें।

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