हिंदू धर्म में गुरु को ईश्वर के समान ही पूजनीय स्थान दिया गया है। गुरु ही वह मार्गदर्शक होते हैं, जो मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान और सत्य के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। इसी गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित गुरु पूर्णिमा का पर्व हर वर्ष आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में गुरु पूर्णिमा का पर्व विशेष महत्व लेकर आ रहा है, क्योंकि इस दिन शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। साथ ही यह पावन तिथि महर्षि वेदव्यास जयंती के रूप में भी मनाई जाती है, जिसके कारण इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
गुरु पूर्णिमा 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 28 जुलाई 2026 को दोपहर 2 बजकर 48 मिनट पर होगी और इसका समापन 29 जुलाई 2026 को शाम 4 बजकर 35 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर गुरु पूर्णिमा और आषाढ़ पूर्णिमा व्रत 29 जुलाई 2026, बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन प्रातः स्नान, गुरु पूजन, दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शांति प्रदान करने वाली मानी जाती है।
गुरु पूर्णिमा पर बन रहा है शुभ योगों का संयोग
वर्ष 2026 की गुरु पूर्णिमा पर प्रीति योग और आयुष्मान योग का शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन शुभ योगों में किए गए पूजा-पाठ, मंत्र जाप, दान और शुभ कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है। ऐसा माना जाता है कि इन योगों के प्रभाव से जीवन में सुख, समृद्धि, यश और सौभाग्य की वृद्धि होती है। इसलिए इस दिन गुरु पूजन के साथ जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान करना भी अत्यंत शुभ माना गया है।
महर्षि वेदव्यास से जुड़ा है गुरु पूर्णिमा का महत्व
गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने वेदों का विभाजन किया और महाभारत सहित 18 पुराणों की रचना कर भारतीय ज्ञान परंपरा को नई दिशा प्रदान की। महर्षि वेदव्यास को आदिगुरु की उपाधि दी गई है। उनके योगदान को स्मरण करते हुए इस दिन गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया जाता है। गुरु पूर्णिमा केवल आध्यात्मिक गुरु के सम्मान का पर्व नहीं है, बल्कि यह उन सभी व्यक्तियों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर है, जिन्होंने जीवन में सही मार्ग दिखाया है। माता-पिता, शिक्षक और मार्गदर्शक सभी गुरु के समान पूजनीय माने जाते हैं। मान्यता है कि गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करने से व्यक्ति को ज्ञान, विवेक, आत्मविश्वास और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
गुरु पूर्णिमा के दिन करें ये शुभ कार्य
गुरु पूर्णिमा के पावन दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। संभव हो तो पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। इसके बाद अपने गुरु, माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। इस दिन भगवान विष्णु, महर्षि वेदव्यास और देवगुरु बृहस्पति की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। गुरु मंत्र का जाप, धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन और ध्यान-साधना करने से आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। दान-पुण्य के लिए इस दिन अन्न, वस्त्र, पीली वस्तुएं और जरूरतमंदों की सहायता करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से जीवन में सकारात्मकता और शुभ फल की प्राप्ति होने की मान्यता है।