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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > अधिक भानु सप्तमी 2026: तिथि, पूजा विधि, शुभ योग, दान और धार्मिक महत्व
व्रत और त्योहार

अधिक भानु सप्तमी 2026: तिथि, पूजा विधि, शुभ योग, दान और धार्मिक महत्व

दिव्यसुधा
Last updated: June 6, 2026 12:31 pm
दिव्यसुधा
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अधिक भानु सप्तमी 2026 पर उगते सूर्य देव को तांबे के लोटे से अर्घ्य अर्पित करते श्रद्धालु
अधिक भानु सप्तमी पर सूर्य देव को अर्घ्य देने से आरोग्य, यश, आत्मबल और सौभाग्य की प्राप्ति होने की मान्यता है।
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सनातन धर्म में भगवान सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना गया है। वे ऐसे देव हैं जिनके दर्शन प्रतिदिन सभी को सहज रूप से प्राप्त होते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव ऊर्जा, आरोग्य, तेज, यश और सौभाग्य के प्रतीक हैं। यही कारण है कि उनकी उपासना के लिए रविवार का दिन विशेष माना गया है। जब रविवार के दिन सप्तमी तिथि पड़ती है, तब उसे भानु सप्तमी कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व अधिक मास में पड़ रहा है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है।

अधिक भानु सप्तमी 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार अधिक ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि 7 जून 2026 को प्रातः 2:40 बजे प्रारंभ होगी और 8 जून 2026 को रात्रि 12:21 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर अधिक भानु सप्तमी का पर्व 7 जून 2026, रविवार को मनाया जाएगा।

इस दिन सूर्योदय प्रातः 5:23 बजे होगा। विशेष बात यह है कि सूर्योदय के समय से प्रातः 7:55 बजे तक द्विपुष्कर योग और रवि योग का शुभ संयोग रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन शुभ योगों में की गई सूर्य उपासना का पुण्यफल कई गुना बढ़ जाता है।

अधिक भानु सप्तमी की पूजा विधि
भानु सप्तमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान और ध्यान करना शुभ माना गया है। पूजा से पहले तन और मन की शुद्धि का विशेष महत्व बताया गया है। यदि संभव हो तो इस दिन पीले या स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में शुद्ध जल या गंगाजल भरें और उसमें रोली, चंदन, अक्षत तथा लाल पुष्प डालें। इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके उगते हुए सूर्य देव को “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जप करते हुए अर्घ्य अर्पित करें।

अर्घ्य देने के बाद दीपक जलाकर सूर्य देव की आराधना करें और आदित्य हृदय स्तोत्र, सूर्याष्टक या सूर्य चालीसा का पाठ करें। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई यह पूजा सूर्य देव की विशेष कृपा दिलाती है।

दान का महत्व
भानु सप्तमी पर दान-पुण्य का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन श्रद्धालुओं को अपनी सामर्थ्य के अनुसार गेहूं, गुड़, तांबे के बर्तन, लाल वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना चाहिए। जरूरतमंदों की सहायता करना भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

अधिक भानु सप्तमी का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों में भगवान सूर्य को सूर्य नारायण कहा गया है, क्योंकि उन्हें भगवान विष्णु का ही स्वरूप माना जाता है। वहीं अधिक मास भी भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। यही कारण है कि अधिक मास में आने वाली भानु सप्तमी का महत्व सामान्य भानु सप्तमी से कहीं अधिक माना जाता है।

मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से सूर्य पूजा करने पर व्यक्ति को आरोग्य, सुख, समृद्धि, यश और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आत्मबल बढ़ता है।

अधिक भानु सप्तमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सूर्य ऊर्जा से जुड़ने और जीवन में अनुशासन, स्वास्थ्य तथा सकारात्मकता को अपनाने का अवसर है। यदि इस दिन श्रद्धा, नियम और सेवा भाव के साथ सूर्य नारायण की उपासना की जाए, तो जीवन में सुख, सफलता और समृद्धि के नए द्वार खुलने की मान्यता है।

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