Saturday, 30 Aug 2025
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > सीता नवमी कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा 
व्रत और त्योहार

सीता नवमी कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा 

दिव्यसुधा
Last updated: May 4, 2025 2:41 pm
दिव्यसुधा
Share
sita navmi
SHARE

Written By : Ekta Mishra

पंचांग के अनुसार, हर वर्ष वैशाख माह के शु्क्ल पक्ष की नवमी तिथि को सीता नवमी मनाई जाती है. राम नवमी के एक महीने बाद सीता नवमी मनाई जाती है. इसे जानकी जंयती के नाम से भी जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन माता सीता धरती पर अवतरित हुई थी. माता सीता को जानकी, मैथिली, सिया आदि नामों से भी जाना जाता है. सीता नवमी के दिन सुहगिन महिलाएं पति की लंबी आयु और परिवार में सुख-शांति के लिए भगवान राम और माता सीता की पूजा करती हैं. कहते हैं इस दिन विधिपूर्वक व्रत का पालन करने से अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है.

पंचांग के अनुसार, वैशाख माह शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत 5 मई को सुबह 7:35 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन अगले दिन 6 मई को सुबह 8:38 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, इस साल सीता नवमी का व्रत 5 अप्रैल को रखा जाएगा. सीता नवमी के दिन पूजा करने का शुभ मुहूर्त सुबह 10:58 मिनट से लेकर दोपहर 1:38 मिनट तक रहेगा. ऐसे में भक्तों को भगवान राम और माता सीता की पूजा के लिए कुल 2 घंटे 40 मिनट का समय मिलेगा.

पूजा विधि
सीता नवमी के दिन पूजा करने के लिए सीता प्रातः काल उठकर स्नान करें.पूजा-घर के साथ-साथ घर की भी साफ-सफाई करें. उसके बाद एक चौकी पर पीले या लाल रंग का वस्त्र बिछाएं. इस पर श्री राम और माता सीता की प्रतिमा को स्थापित करें. माता सीता का श्रृंगार करें और उन्हें सुहाग की सामग्री अर्पित करें. फिर घी या तिल के तेल का दीपक जलाकर फूल, अक्षत, रोली और धूप आदि से पूजा करें. मंत्र का जाप करें. लाल और पीले रंग के फूल अर्पित करके भोग लगाएं. भगवान से प्रार्थना करें. पूजा में व्रत कथा का पाठ और आरती करें.

कथा
रामायण के अनुसार, मिथिला की धरती पर कई वर्ष तक पानी की एक बूंद भी नहीं पड़ी थी। इस बात को लेकर राजा जनक बेहद चिंतित थे। उन्होंने इस बात को लेकर ऋषि-मुनियों से विचार-विमर्श किया और समस्या का समाधान करने का अनुरोध किया। ऐसे में ऋषि-मुनियों ने राजा जनक को खेत में हल चलाने की सलाह दी। ऋषि-मुनियों ने कहा कि यदि राजा जनक यदि आप ऐसा ही करेंगे, तो इंद्र देवता की कृपा अवश्य बरसेगी। राजा जनक ने ऋषि-मुनियों के आदेश का पालन करते हुए वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन खेत में हल चलाया। इस दौरान उनके हल से कोई वस्तु टकराई, यह देख राजा जनक ने सेवादारों से उस जगह की खुदाई करवाई। उस जगह की खुदाई के दौरान उन्हें एक कलश मिला, जिसमें एक कन्या थी। राजा जनक ने उन्हें अपनी पुत्री मानकर उनका पालन-पोषण किया। राजा जनक ने उस कन्या का नाम सीता रखा। राजा जनक की बेटी होने के कारण उन्हें जानकी जी भी कहा जाता है। इसके अलावा माता सीता को मैथिली और भूमिजा के नाम से भी पुकारा जाता है। दरअसल, भूमि से जन्म लेने की वजह से उनका नाम भूमिजा पड़ा। कहते हैं कि सीता जी के प्रकट होते ही मिथिला राज्य में जमकर बारिश हुई और वहां का सूखा दूर हो गया। तभी से हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर सीता नवमी मनाई जाती है।

Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article भुकुंट भैरवनाथ केदारनाथ धाम के रक्षक भुकुंट भैरवनाथ के खुले कपाट, बाबा केदार की भव्य संध्या आरती का शुभारंभ
Next Article माँ बगलामुखी Baglamukhi Jayanti 2025 : आज बगलामुखी जयंती, जानिए पूजा विधि और माता के मंत्र
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Your Trusted Source for Accurate and Timely Updates!
Our commitment to accuracy, impartiality, and delivering breaking news as it happens has earned us the trust of a vast audience. Stay ahead with real-time updates on the latest events, trends.
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

आदि शंकराचार्य जयंती 2025
व्रत और त्योहार

आदि शंकराचार्य जयंती 2025: जानें तिथि, पूजा विधि और इसका आध्यात्मिक महत्व

By दिव्यसुधा
व्रत और त्योहार

परिवर्तिनी एकादशी 2025: तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि, जानें व्रत का महत्व

By दिव्यसुधा
vishnu ji, shree krishn
व्रत और त्योहार

श्रीहरि की कृपा चाहिए? तो वैशाख में अपनाएं ये सरल उपाय

By दिव्यसुधा
hanuman ji
व्रत और त्योहार

पहला बड़ा मंगल कल, जानें इस ज्येष्ठ माह में कितने मंगलवार होंगे

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?