पितृ पक्ष का पर्व भारतीय संस्कृति में अपने पूर्वजों की स्मृति को समर्पित होता है। इस अवसर पर कई लोग दान, पूजा और सेवा कार्य करते हैं। बिलासपुर स्थित सनाढ्य ब्राह्मण महिला मंडल ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए एक अनूठा और प्रेरणादायक कदम उठाया। स्वर्गीय किशोरी लाल मिश्रा जी एवं स्वर्गीय श्रीमती उर्मिला मिश्रा जी की स्मृति में दिनांक 16 सितंबर को राम रसोई, पुराना बस स्टैंड, हनुमान मंदिर के समीप निशुल्क भोजन वितरण का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन और उद्देश्य
समाज सेवा की भावना को जन-जन तक पहुँचाना।
पितृ पक्ष के अवसर पर अपने पूर्वजों को याद करते हुए जरूरतमंदों तक भोजन पहुँचाना।
समाज की महिलाओं और युवाओं को सेवा कार्य में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित करना।
महिला मंडल की सक्रिय सदस्यों ने स्वयं आयोजन की पूरी जिम्मेदारी संभाली और आम नागरिकों को बैठाकर भोजन कराया। यह केवल भोजन वितरण नहीं, बल्कि “सेवा ही धर्म है” की भावना का जीवंत उदाहरण था।
महिलाओं की सक्रिय भागीदारी
सनाढ्य ब्राह्मण महिला मंडल लंबे समय से समाज सेवा और सांस्कृतिक गतिविधियों में अग्रणी रहा है। इस कार्यक्रम में विशेष रूप से महिलाओं की सक्रियता देखने को मिली।
अध्यक्ष डॉ. श्रीमती तनुजा बिरथरे ने सभी को एक सूत्र में बांधकर आयोजन की कमान संभाली।
सचिव श्रीमती पूनम पराशर और कोषाध्यक्ष श्रीमती दीप्ति मिश्रा ने आयोजन की व्यवस्थाओं को सुनिश्चित किया।
इसके साथ ही श्रीमती पिंकी उपाध्याय, श्रीमती आसना द्विवेदी, श्रीमती शैला मिश्रा, श्रीमती शोभा त्रिपाठी, श्रीमती भावना मिश्रा, श्रीमती नीरजा दीक्षित, श्रीमती कोकिला उपाध्याय, श्रीमती विभा मिश्रा, श्रीमती मीना दुबे, श्रीमती दीप्ति गुबरेले और श्रीमती सौम्या मिश्रा जैसी अनेक महिलाओं ने भोजन परोसने और सेवा कार्य में पूरी तन्मयता से भाग लिया।
महिला मंडल ने साबित किया कि समाज सेवा केवल दान नहीं, बल्कि संवेदना और करुणा का विस्तार है।
पुरुषों का सहयोग
इस आयोजन में समाज के वरिष्ठ और युवा पुरुषों का सहयोग भी सराहनीय रहा। श्री ओ.पी. बिरथरे, श्री विवेक पाराशर, श्री राजेश मिश्रा, श्री लक्ष्मी नारायण दीक्षित, श्री अभय बरुआ, श्री यश मिश्रा, श्री प्रमोद दीक्षित, श्री राकेश मिश्रा, श्री अशोक त्रिपाठी और श्री अंशुल मिश्रा सहित कई सदस्य उपस्थित रहे।
उन्होंने न केवल आयोजन की तैयारी में मदद की, बल्कि भोजन वितरण के दौरान व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों को सहयोग देने में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
भोजन प्रसाद का महत्व
भोजन प्रसाद में स्वाद और परंपरा का सुंदर मेल देखने को मिला। आम नागरिकों को बैठाकर पहले भोजन परोसा गया और बाद में मिष्ठान का वितरण किया गया। प्रसाद ग्रहण करने वाले नागरिकों के चेहरों पर संतोष और आभार साफ झलक रहा था।
यह दृश्य मानो यही संदेश दे रहा था कि “जब भोजन प्रेम और श्रद्धा से परोसा जाए, तो वह मात्र अन्न नहीं बल्कि अमृत बन जाता है।”
समाज सेवा के व्यापक आयाम
यह आयोजन केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज सेवा की लंबी परंपरा का हिस्सा था। सनाढ्य ब्राह्मण समाज समय-समय पर ऐसे कार्यों का आयोजन करता रहा है—
गरीब और जरूरतमंदों के लिए भोजन वितरण।
धार्मिक अवसरों पर सामूहिक भंडारे।
शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी सेवाएँ।
इस कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि समाज सेवा तभी सार्थक है जब उसमें सामूहिक भागीदारी हो।
पूर्वजों की स्मृति में सेवा
पितृ पक्ष का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पीढ़ियों के बीच भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। स्वर्गीय किशोरी लाल मिश्रा और स्वर्गीय उर्मिला मिश्रा की स्मृति में आयोजित यह भोजन वितरण उनकी सेवा भावना और समाजप्रेम की स्मृति को जीवंत करता है।
नागरिकों की प्रतिक्रियाएँ
भोजन प्रसाद का स्वाद चखने वाले नागरिकों ने कहा कि समाज के इस कदम से न केवल भूख मिटती है, बल्कि हृदय को भी तृप्ति मिलती है। कई बुजुर्गों ने कहा कि “ऐसे आयोजन हमें हमारी पुरानी परंपराओं की याद दिलाते हैं, जब गाँव-गाँव में लोग एक-दूसरे के दुख-सुख में साथ रहते थे।”
समाज सेवा का संदेश
इस कार्यक्रम से स्पष्ट संदेश जाता है कि समाज सेवा केवल दान या आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है। इसमें समर्पण, श्रम और भावनात्मक जुड़ाव सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं। जब समाज की महिलाएँ, पुरुष और युवा मिलकर किसी नेक काम में जुटते हैं, तो …