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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > शिव और शनिदेव की कृपा पाने के लिए शनि प्रदोष पर अपनाएं ये उपाय
व्रत और त्योहार

शिव और शनिदेव की कृपा पाने के लिए शनि प्रदोष पर अपनाएं ये उपाय

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। साल 2025 में यह व्रत 24 मई, शनिवार को मनाया जाएगा।

दिव्यसुधा
Last updated: May 23, 2025 5:40 pm
दिव्यसुधा
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pradosh vart
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हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। साल 2025 में यह व्रत 24 मई, शनिवार को पड़ेगा। चूंकि यह व्रत शनिवार को है, इसलिए इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है, लेकिन शनिवार को पड़ने पर इसमें शनिदेव की भी विशेष पूजा की जाती है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से शिवजी और शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है।

मई महीने का आखिरी प्रदोष व्रत कब है

पंचांग के अनुसार, प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि में रखा जाता है। इस बार त्रयोदशी तिथि 24 मई शाम 7:20 पर शुरू होगी और 25 मई को दोपहर 3:51 तक रहेगी। शास्त्रीय विधान के अनुसार, त्रयोदशी तिथि जब शाम के समय लगी होती है उस समय प्रदोष व्रत किया जाता है।

प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त

24 मई को पूजा के लिए शुभ चौघड़िया का समय सुबह 8:52 से 10: 35 तक है।
शाम की पूजा के लिए लाभ चौघड़िया दोपहर 3:45 से 5:28 तक है।
अमृत चौघड़िया शाम 5:28 से 7:11 तक है।

शनि की बाधाओं से मुक्ति

शिव पुराण और अन्य ग्रंथों में शनि प्रदोष व्रत की बड़ी महिमा बताई गई है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने से जीवन की कई परेशानियां दूर हो जाती हैं। खासकर जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का असर है, उन्हें इस व्रत से बहुत लाभ मिलता है और शनि के प्रभाव से राहत मिलती है।

शनि प्रदोष के दिन शिवलिंग पर तिल के तेल से अभिषेक करें

इस दिन भगवान शिव की पूजा का खास महत्व होता है। सुबह स्नान करने के बाद शिवलिंग पर तिल के तेल से अभिषेक करें। इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। साथ ही शनिदेव को तिल या सरसों का तेल चढ़ाएं। मान्यता है कि शिवजी और शनिदेव की कृपा से जीवन से दुर्भाग्य दूर होता है और सुख-शांति मिलती है।

शनि प्रदोष के दिन पीपल की पूजा करें

शनिवार को त्रयोदशी तिथि होने पर पीपल के पेड़ की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन स्नान के बाद गंगाजल में काले तिल मिलाकर पीपल को अर्घ्य दें। फिर उसकी जड़ में पाँच तरह की मिठाइयाँ चढ़ाएं और पेड़ की 11 बार परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय मन में अपनी इच्छाओं को शांत भाव से कहें। ऐसा करने से मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है। ऐसा माना जाता है कि यह उपाय करने से मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं और शनि से जुड़ी नकारात्मकता दूर होती है। यह खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो लंबे समय से परेशानियों और संघर्षों का सामना कर रहे हैं।

शनि प्रदोष व्रत एक खास दिन होता है, जब शिवजी और शनिदेव दोनों की कृपा एक साथ मिल सकती है। इस दिन व्रत, पूजा और ध्यान करने से नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सुख-शांति और शुभता आती है।

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