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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > नवरात्रि विशेष…माँ दुर्गा के अलग-अलग रूप को, अलग-अलग प्रकार के भोग लगाने से पूरी होगी हर मनोकामना
व्रत और त्योहार

नवरात्रि विशेष…माँ दुर्गा के अलग-अलग रूप को, अलग-अलग प्रकार के भोग लगाने से पूरी होगी हर मनोकामना

दिव्यसुधा
Last updated: April 3, 2025 11:26 am
दिव्यसुधा
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chaitra navratri
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नवरात्री के नौ दिनों में माँ की पूजा अलग अलग विधि विधान से होती है, जैसे माता के अलग अलग स्वरुप होते है वैसे ही माँ को भोग भी अलग लगाया जाता है। तो आइये जानते है किस दिन कौन सा भोग लगाने से माँ की विशेष कृपा होगी।

रविवार 30 मार्च से चैत्र नवरात्र की शुरूआत हो रही है, जिसकी समाप्ति 6 अप्रैल को होगी. नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की की पूजा की जाती है. नौ दिनों के इस पर्व को भक्त जन बडे़ ही श्रद्धा भाव से मनाते हैं. कुछ लोग नवरात्र में पूरे 9 दिन के व्रत रखते हैं तो वही कुछ लोग केवल शुरुआत और आखिरी के व्रत भी करते है।

मां शैलपुत्री-
नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है. इसी दिन मां के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की उपासना की जाती हैं. मां को संफेद प्रिय है. मां को भोग में शुद्ध गाय के घी या घी से बनी चीजों को भोग लगाया जाता है. मान्यता है कि इससे आरोग्य का अर्शीवाद मिलता है.

मां ब्रह्मचारिणी –
चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन देवी मां के दूसरे स्वरूप की पूजा की जाती है. भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए मां ने कठोर तपस्या की थी इस कठोर तपस्या के कारण उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा. मां का प्रिय भोग शक्कर माना जाता है शक्कर का भोग लगाने से आयु लंबी की प्राप्ति होती है.

मां चंद्रघंटा –
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां दुर्गा ने दानवों के आतंक को समाप्त करने के लिए चंद्रघंटा का रूप लिया था. माँ के इस अवतार ने महिषासुर का वध कर देवताओं की रक्षा की थी। मां चंद्रघंटा को दूध का भोग लगाया जाता है. माता को दूध से बनी मिठाई या खीर का भोग लगाने से धन लाभ होता है।

मां कुष्मांडा –
 मान्यता है कि मां कुष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की है. मां को मालपुए का भोग लगाया जाता है. मां को मालपुए अत्यंत प्रिय हैं. भोग से प्रसन्न होकर मां अपने भक्तों की सभी इच्छा पूरी कर देती हैं.

मां स्कंदमाता –
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने अपने पुत्र कार्तिकेय को युद्ध के लिए तैयार करने के लिए स्कंदमाता का रूप लिया था. मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाया जाता है मान्यता है कि मां को केले का भोग लगाने से शारीरिक रोगों से मुक्ति मिलती है.

मां कात्यानी –
महर्षि कात्यायन के घर जन्म लेने के कारण माता का नाम कात्यानी पड़ा. देवी कात्यानी को देवी दुर्गा का छठा रूप कहा जाता है. मां को शहद बहुत पसंद हैं. शहद का भोग लगाने से आकस्मिक मृत्यु नहीं होती है

मां महागौरी –
महागौरी को मां पार्वती के रूप  माना जाता है.  आठवें दिन को अष्टमी कहा जाता है. सभी भक्त इन दिन विशेष उपासना करते है. इस दिन नारियल का भोग लगता है. नारियल को भोग लगने से मां अपकी मनोकामना पूरी करती हैं.

मां सिद्धदात्री –
मां सिद्धदात्री को शक्ति का रूप कहा जाता है. मां भक्तों के भक्ती से प्रसन्न होकर नौ सिद्ध दें सकती हैं. नवरात्र के नौंवे दिन इनकी पूजा- हवन होने के बाद कन्याओं की पूजा की जाती है है. इस दिन मां को हलवा-पूरी.और चने की सब्जी का भोग लगाया जाता है फिर उस प्रसाद को कुमारी कन्याओं को खिलाया जाता है और खुद भी खाकर अपना नौ दिन के व्रत को समाप्त करते हैं.

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