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दिव्य सुधा > सनातन धर्म > भगवान > भगवान श्रीहरि विष्णु जी
भगवान

भगवान श्रीहरि विष्णु जी

दिव्यसुधा
Last updated: March 5, 2025 6:01 am
दिव्यसुधा
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vishnu ji
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विष्णुजी सनातन धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं जिनको नारायण और हरि के नाम से भी जाना जाता है। विष्णुजी को जगत का पालनकर्ता माना जाता है, जब अधर्म और पाप बढ़ता है तब वे अवतार लेते हैं। वैष्णववाद के भीतर सर्वोच्च हैं, जो समकालीन हिन्दू धर्म के भीतर प्रमुख परंपराओं में से एक है। भगवान विष्णु, त्रिमूर्ति के तीन रूपों में से एक हैं. त्रिमूर्ति के अन्य दो रूप ब्रह्मा और शिव हैं. भगवान विष्णु को जगत का पालनहार कहा जाता है.  भगवान विष्णु को नारायण के नाम से भी जाना जाता है.  भगवान विष्णु के चार हाथ होते हैं और उनके हाथों में गदा, चक्र, शंख, और कमल होता है.  भगवान विष्णु शांत प्रकृति के देवता हैं और वे शेषनाग पर विश्राम करते हैं.  भगवान विष्णु के कई अवतार हुए हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख अवतार हैं – मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध, और कल्कि. भगवान विष्णु को लक्ष्मी का पति माना जाता है. 

भगवान विष्णु के बारे में कहा जाता है कि वे सभी में व्याप्त हैं.  शिव पुराण के अनुसार, चिरकाल में भगवान सदाशिव और मां आदिशक्ति (मां दुर्गा) काशी नगरी में भ्रमण कर रहे थे। उस समय भगवान सदाशिव ने मां आदिशक्ति से कहा-हे देवी, मैं चाहता हूं कि भूमंडल में दूसरा व्यक्ति भी हो। तब मां दुर्गे ने कहा-हे प्रभु, आपकी सोच में संशय कैसा है? आप सृष्टि के पालनहार है, आपने सृष्टि की भलाई के लिए ऐसा सोचा होगा। उस समय भगवान सदाशिव ने देवी दुर्गा के संवाद को सुनकर-अपने वाम अंग पर अमृत स्पर्श किया। इससे एक पुरुष की उत्पत्ति हुई, जिसके तेज से पूरा ब्रह्मांड प्रकाशमय हो रहा था। उस समय भगवान सदाशिव ने कहा- वत्स तुम ब्रह्मांड में सर्वत्र व्याप्त हो, इसलिए तुम्हारा नाम विष्णु रखता हूं। उसके बाद भगवान विष्णु जी ने कहा-हे प्रभु, मेरे लिए क्या आज्ञा है! तब भगवान सदाशिव ने उन्हें तप करने की आज्ञा दी। इसके बाद चिरकाल में भगवान श्रीहरि विष्णु जी ने तप किया। इस तप के पुण्य प्रताप से जल की उत्पत्ति हुई, जिससे जीवन का सृजन हुआ। भगवान विष्णु की सवारी गरुड़ है। इनके एक हाथ में कौमोदकी गदा है। जबकि दूसरे हाथ में पाञ्चजन्य शंख है। तीसरे हाथ में सुदर्शन चक्र और चौथे हाथ में कमल है।

भगवान श्रीहरि विष्णु जी के दसावतार

1. मत्स्य, 2. कूर्म, 3. वराह, 4. भगवान नृसिंह, 5. वामन, 6. श्रीराम, 7. श्रीकृष्ण, 8. परशुराम, 9. बुद्ध, 10. कल्कि

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