Thursday, 5 Feb 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > नवरात्रि विशेष… नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की व्रत कथा, मिलेगी हर बाधा और भय से मुक्ति
व्रत और त्योहार

नवरात्रि विशेष… नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की व्रत कथा, मिलेगी हर बाधा और भय से मुक्ति

दिव्यसुधा
Last updated: April 5, 2025 12:24 pm
दिव्यसुधा
Share
maa kaalratri
SHARE

नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-आराधना की जाती है. शास्त्रों में माता कालरात्रि को शुभंकरी, महायोगेश्वरी और महायोगिनी भी कहा जाता है. माँ कालरात्रि की विधि पूर्वक पूजा अर्चना और व्रत करने वाले भक्तों को मां सभी बुरी शक्तियां और काल से बचाती हैं. मां कालरात्रि का जन्म भूत-प्रेतों और दानवों के विनाश के लिए हुआ था.

मां कालरात्रि की व्रत कथा –
पौराणिक कथा के अनुसार, नमुची नाम के राक्षस को इंद्रदेव ने मार दिया था, जिसका बदला लेने के लिए शुंभ और निशुंभ नाम के दो दुष्ट राक्षसों ने रक्तबीज नाम के एक अन्य राक्षसों के साथ देवताओं पर हमला कर दिया. देवताओं के वार से उनके शरीर से रक्त की जितनी बूंदे गिरी, उनके पराक्रम से अनेक दैत्य उत्पन्न हुए. जिसके बाद सभी राक्षसों ने मिलकर पूरे देवलोक पर कब्जा कर लिया.

देवताओं पर विजय प्राप्त करने के लिए रक्तबीज के साथ महिषासुर के मित्र चंड और मुंड ने उनकी सहायता की थी, जिसका वध मां दुर्गा के द्वारा हुआ था. चंड-मुंड के वध के बाद सभी राक्षस गुस्से से भर गए और सभी राक्षस मिलकर देवताओं पर हमला कर दिया और उनको पराजित करके तीनों लोकों पर अपना आधिपत्य जमा लिय। राक्षसों के आतंक से डरकर सभी देवता देवी पार्वती के पास जाकर प्रार्थना की.

देवताओं की सहायता करने के माँ पार्वती ने चंडिका का रूप धारण किया। देवी चंडिका शुंभ और निशुंभ द्वारा भेजे गए अधिकांश राक्षसों को मारने में सक्षम थीं. लेकिन चंड व मुंड और रक्तबीज जैसे राक्षस बहुत शक्तिशाली थे और वह उन्हें मारने में असमर्थ थी. तब देवी चंडिका ने अपने शीर्ष से देवी कालरात्रि की उत्पत्ति की. मां कालरात्रि ने चंड व मुंड से युद्ध करके उनका वध कर दिया . मां के इस रूप को चामुंडा भी कहा जाता है.

सभी राक्षसों का वध करने के बाद भी वह रक्तबीज का वध नहीं कर पाई थीं. रक्तबीज को ब्रह्मा जी से एक विशेष वरदान प्राप्त था कि यदि उसके रक्त की एक बूंद भी जमीन पर गिरती है, तो उसके बूंद से उसका एक और रक्तबीज पैदा हो जाएगा. इसलिए, जैसे ही मां कालरात्रि रक्तबीज पर हमला करती रक्तबीज का एक और रूप उत्पन्न हो जाता. मां कालरात्रि ने सभी रक्तबीज पर आक्रमण किया, लेकिन सेना केवल बढ़ती चली गई.

जैसे ही रक्तबीज के शरीर से खून की एक बूंद जमीन पर गिरती थी, उसके समान कद का एक और महान राक्षस प्रकट हो जाता था. यह देख मां कालरात्रि अत्यंत क्रोधित हो उठीं और रक्तबीज के हर हमशक्ल दानव का खून पीने लगीं. मां कालरात्रि ने रक्तबीज के खून को जमीन पर गिरने से रोक दिया और अंततः सभी दानवों का अंत हो गया. बाद में, उन्होंने शुंभ और निशुंभ को भी मार डाला और तीनों लोकों में शांति की स्थापना की.

Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article नवरात्रि विशेष… नवरात्रि के छठे दिन करें माँ कात्यायनी की आराधना और व्रत कथा
Next Article hanuman mandir एक ऐसा मंदिर जहां साल में एक बार खुलता हैं कपाट
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

कच्छप अवतार
व्रत और त्योहार

भगवान विष्णु के कच्छप अवतार का पावन पर्व, जानें तिथि, पूजा विधि और महत्व

By दिव्यसुधा
उत्पन्ना एकादशी पूजा करते हुए भक्त
व्रत और त्योहार

उत्पन्ना एकादशी 2025: व्रत, कथा और महत्व

By दिव्यसुधा
सूर्य देव को जल अर्पित करना"
व्रत और त्योहार

पौष मास 2025: महत्व, पूजा, व्रत और शुभ कार्य

By दिव्यसुधा
लोहड़ी 2026 का पर्व – अग्नि, भांगड़ा और पारंपरिक उत्सव का दृश्य
व्रत और त्योहार

लोहड़ी 2026: इतिहास, महत्व और आध्यात्मिक संदेश

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?