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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > चैत्र पूर्णिमा 2025: हनुमान जी के प्रकट होने का पावन दिन
व्रत और त्योहार

चैत्र पूर्णिमा 2025: हनुमान जी के प्रकट होने का पावन दिन

दिव्यसुधा
Last updated: April 12, 2025 5:16 am
दिव्यसुधा
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hanuman jayanti
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हनुमान जयंती हिन्दू धर्म का प्रसिद्ध त्यौहार है जो संकटमोचन हनुमान जी को समर्पित है। हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में हनुमान जयंती के पर्व को मनाया जाता है। हनुमान जी को संकट मोचन, बजरंग बली, पवन पुत्र आदि नामों से भी जाना जाता है। सभी देवताओं में से सबसे शीघ्र प्रसन्न होने वाले और चिरंजीव भगवान हनुमान की जयंती देशभर में अत्यंत श्रद्धाभाव एवं धूमधाम से मनाई जाती है। साल 2025 में चैत्र पूर्णिमा 12 अप्रैल को है और इस दिन हनुमान जयंती मनाई जाएगी. इस दिन हनुमान जयंती की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 3 बजकर 21 मिनट से सुबह 5 बजकर 51 मिनट तक रहेगा. शास्त्रों के मुताबिक, अभिजीत मुहूर्त में पूजा करने से विशेष फल मिलता है.

हिन्दुओं के धार्मिक ग्रंथ रामायण के प्रमुख किरदारों में से एक हनुमान जी है जिन्हे शिव जी के ग्यारहवें रुद्र अवतार माना गया है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि पर हनुमान जयंती को मनाने की परंपरा है। अंग्रेज़ी कैलेंडर के अनुसार, यह पर्व अधिकतर मार्च या अप्रैल महीने के दौरान पड़ता है। हनुमान जयंती का बहुत ही महत्व होता है। हनुमान जी अत्यंत दयालु है और वे हमेशा अपने भक्तों पर कृपा बनाए रखते है, साथ ही हर संकट से उनकी रक्षा करते हैं। इस दिन भगवान हनुमान की पूजा-आराधना और व्रत करना अत्यंत फलदायी होता है।

हनुमान जयंती का महत्व
हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है हनुमान जयंती। संकटमोचन हनुमान को गुणवत्ता और जीवन शक्ति की छवि माना गया है। हनुमान जी का जन्म वानर राज केसरी और उनकी पत्नी अंजना के घर में हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि माता अंजना अपने पूर्व जन्म में एक अप्सरा थीं। माता-पिता के कारण ही हनुमानजी को आंजनेय और केसरीनंदन के नाम से भी पुकारा जाता है। ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी अपनी इच्छा से किसी भी रूप को धारण करने में सक्षम हैं, चट्टानों को उठा सकते हैं, पहाड़ों को हिला सकते हैं, तीव्र गति से कभी भी कही भी पहुँच सकते हैं, उड़ान में गरुड़ के समान वेगवान हैं। हनुमान को महान भारतीय महाकाव्य ‘रामायण’ के सर्वोत्तम नायकों में से प्रमुख माना जाता है। सभी देवी-देवताओं में मात्र वायुपुत्र हनुमान ही ऐसे देवता माने गए है जो कलयुग में भी सशरीर धरती पर मौजूद है। यही वजह है कि हनुमान जी सदैव अपने भक्तों की सहायता करते है। हनुमान जयंती के पर्व को मुख्य रूप से हनुमान जी के भक्तों द्वारा अपार भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता हैं। हनुमान जयंती पर विधिपूर्वक हनुमान जी के पूजन से इनके आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। संकटमोचन हनुमान अपने भक्तों की सभी संकटों से रक्षा करते हैं, साथ ही उनकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ण करते है। हनुमान जयंती के दिन बजरंगबली की पूजा करना सर्वोत्तम होता है। इस दिन पूजा करने से मनुष्य को भय, ग्रह दोष और संकटों से मुक्ति मिलती है।

संकटमोचन हनुमान से जुड़ीं पौराणिक कथा
हिन्दू धर्मग्रंथों में हनुमान जी के जन्म से सम्बंधित एक पौराणिक कथा वर्णित है। कथा के अनुसार, अमरत्व की प्राप्ति के लिए जब देवताओं व असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, तब उससे निकले अमृत को असुरों ने छीन लिया और आपस में ही लड़ने लगे। उस समय भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया। मोहनी रूप देख देवता व असुर तो क्या स्वयं भगवान शिवजी कामातुर हो गए। इस समय भगवान शिव ने जो वीर्य त्याग किया उसे पवनदेव ने वानरराज केसरी की पत्नी अंजना के गर्भ में प्रविष्ट कर दिया, जिसके फलस्वरूप माता अंजना के गर्भ से केसरी नंदन मारुती संकट मोचन रामभक्त श्री हनुमान का जन्म हुआ।

हनुमान जयंती पर अवश्य करें ये कार्य
हनुमान जयंती के दिन मंदिर जाकर हनुमान जी के दर्शन करें और उनके समक्ष घी या तेल का दीपक जलाएं। 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। ऐसा करने से हनुमान जी आपकी सभी समस्याओं को दूर करते है।
इस दिन हनुमान जी की कृपा प्राप्ति के लिए उन्हें गुलाब की माला अर्पित करें। हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय है।
इस दिन धन प्राप्ति के लिए हनुमान मंदिर में हनुमानजी के सामने चमेली के तेल का दीपक प्रजव्वलित करें। इसके अतिरिक्त सिंदूर लगाकर हनुमान जी को चोला चढ़ाएं।
किसी भी तरह की धन हानि से बचने के लिए हनुमान जयंती पर 11 पीपल के पत्तों पर श्रीराम नाम लिखकर हनुमान जी को अर्पित करें। ऐसा करने से आपकी धन संबंधित समस्याएं दूर होती हैं।

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