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दिव्य सुधा > सनातन धर्म > मंदिर > खुले आसमान के नीचे विराजमान हैं शिकारी देवी मंदिर
मंदिर

खुले आसमान के नीचे विराजमान हैं शिकारी देवी मंदिर

दिव्यसुधा
Last updated: March 22, 2025 10:11 am
दिव्यसुधा
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शिकारी देवी मंदिर
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भारत में बहुत से देवी देवताओं के मंदिर हैं और भारत को मंदिरों और ऋषियों की तपोस्थली भी कहा जाता है. यहां बहुत से रहस्यमयी और अनोखे मंदिर स्थित हैं. इन सभी मंदिरों की अपनी एक खास विशेषताएं हैं. इन मंदिरों से जुड़ी रोचक तथ्य हर किसी को हैरान कर देती हैं. यहां एक मंदिर अपने चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध हैं वहीं इसका वैज्ञानिक आधार भी काफी मजबूत माना जाता है.

देवभूमि हिमाचल के कई मंदिर आज भी कई रहस्यों से भरे पड़े है. इन रहस्यों को आज तक कोई सुलझा नहीं पाया हैं. ऐसा ही एक धार्मिक स्थल मंडी जिले में भी स्थित है. जंजैहली से 16 किलोमीटर दूर शिकारी देवी मंदिर एक ऐसा मंदिर है. सर्दियों के मौसम में यहां पर छह से सात फीट तक बर्फ गिरती है लेकिन यह भारी बर्फ भी माता के छत रहित मंदिर की मूर्तियों पर नहीं टिक पाती है और न ही इस मंदिर के ऊपर छत टिक पाती है।

मान्यता है कि मार्कंडेय ऋषि ने इस जगह पर कई साल तपस्या की थी. उनकी इसी तपस्या से खुश होकर माता रानी यहां शक्ति रूप में विराजमान हुईं। इसके बाद पांडवों ने यहां अज्ञातवास के दौरान मंदिर का निर्माण करवाया था और इसी मंदिर में मां दुर्गा ने पांडवों को कौरवों के खिलाफ युद्ध जीतने का आशीर्वाद दिया था।

शिकारी देवी की प्रतिमाएं पत्थरों की एक मचान पर स्थापित हैं। शिकारी माता को योगिनी माता भी कहा जाता है। माता की नवदुर्गा मूर्ति, चामुंडा, कमरूनाग और परशुराम की मूर्तियां भी यहां पर स्थापित की गई हैं। नवरात्रों में यहां पर विशेष मेले लगते हैं। इस प्राचीन मंदिर के ऊपर छत का टिकना अपने आप में एक रहस्य बना हुआ है. देव आस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि कई बार मंदिर में छत डालने की कोशिश की गई लेकिन इस मंदिर की छत बनवाने की कोशिश हमेशा ही नाकाम रही. इस मंदिर की दीवारों पर कभी भी छत ठहर ही नहीं पाई. कहा जाता है कि यहां माता रानी खुले आसमान के नीचे रहना पसंद करती हैं. छत डालकर मंदिर के भीतर रहना पसंद नहीं करतीं.

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