अयोध्या की पवित्र नगरी ने वह ऐतिहासिक क्षण फिर जी लिया, जिसका सपना करोड़ों श्रद्धालुओं ने सदियों से देखा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के 161 फीट ऊँचे शिखर पर केसरिया धर्म ध्वज फहराए जाने के साथ ही पूरी अयोध्या में दिव्यता की अनुभूति फैल गई। यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और संस्कृति का ऐसा संगम है जो हिंदू धर्म की आध्यात्मिक धारा को अनंत तक प्रवाहित करता रहेगा। यह पवित्र ध्वज तीन दिव्य प्रतीकों ॐ, सूर्य और कोविदार वृक्ष का वह पावन मिलन है जिसमें सनातन की मूल भावना, रामायण की परंपरा और अयोध्या का राजचिह्न तीनों जीवंत रूप में विराजते हैं। आइए इनके अर्थ को गहराई से समझें।
ॐ: सृष्टि के मूल नाद का प्रतीक
राम मंदिर के ध्वज पर अंकित ॐ सनातन धर्म का मूल आधार है। यह वही दिव्य ध्वनि है जिससे माना जाता है कि पूरी सृष्टि का उद्भव हुआ। हर मंत्र, हर पूजन और हर पवित्र अनुष्ठान का प्रारंभ ओम से होता है क्योंकि यह ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का संयुक्त रूप है। ओम की उपस्थिति अपने आप में आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है। यह पवित्र चिह्न राम मंदिर के ध्वज को न केवल आध्यात्मिक बल देता है, बल्कि अयोध्या की दिव्यता को ब्रह्मांड तक पहुंचाने का माध्यम भी बनता है।
सूर्य: राम की सूर्यवंशी परंपरा का तेज
ध्वज पर बना सूर्य चिह्न भगवान श्रीराम के सूर्यवंश की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है। वैदिक मान्यता के अनुसार श्रीराम सूर्य देव के वंशज हैं, इसलिए उनके शौर्य, तेज और धर्म की स्थापना में सूर्य तत्व सदैव उपस्थित रहा। कथाओं में आता है कि जब श्रीराम का जन्म हुआ, तब सूर्य का रथ एक माह तक स्थिर हो गया था और रात्रि नहीं हुई। यही कारण है कि सूर्य का चिह्न राम मंदिर के ध्वज पर प्रभु की दिव्य शक्ति, तेज और संरक्षण का प्रतीक बनकर स्थापित है।
कोविदार वृक्ष: अयोध्या की प्राचीन पहचान
कोविदार वृक्ष, जिसे अयोध्या का प्राचीन राजचिह्न माना गया है, इस ध्वज की तीसरी मुख्य आकृति है। यह वही वृक्ष है जिसकी पहचान लक्ष्मण ने रामायण काल में भरत की सेना के ध्वज पर देख ली थी। इस वृक्ष का उल्लेख आयुर्वेद तथा कई पौराणिक ग्रंथों में मिलता है। कहा जाता है कि यह वृक्ष सकारात्मक ऊर्जा, उपचार और शांति का प्रतीक है। इसके फूल और पत्ते औषधीय गुणों से भरपूर बताए गए हैं। इसीलिए राम मंदिर के ध्वज में कोविदार का स्थान अयोध्या की सांस्कृतिक धरोहर को फिर से जीवंत करता है।
केसरिया ध्वज का दिव्य स्वरूप
भगवान राम के मंदिर का पवित्र ध्वज पूरी तरह केसरिया रंग में बना है, जो त्याग, तप, वीरता और धर्म का प्रतीक माना जाता है। इसकी लंबाई 22 फीट, चौड़ाई 11 फीट तथा ध्वजदंड 42 फीट का है, जिसे मंदिर के 161 फीट ऊँचे शिखर पर स्थापित किया गया। केवल मुख्य मंदिर ही नहीं, बल्कि परकोटे के छह अन्य मंदिरों पर भी इसी स्वरूप के ध्वज फहराए गए हैं। सभी ध्वज विशेष रूप से अहमदाबाद में तैयार किए गए, और इन्हें अभिजीत मुहूर्त में फहराया गया वही मुहूर्त जिसमें स्वयं भगवान श्रीराम ने जन्म लिया था।
ध्वज: देव उपस्थिति और संरक्षण का आध्यात्मिक संकेत
गरुड़ पुराण में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मंदिर के शिखर पर लहराता ध्वज देवता की उपस्थिति और उनकी कृपा का प्रतीक है। जहां ध्वज लहराता है, वह दिशा पवित्र मानी जाती है। यह पवित्र ध्वज दुनिया को संकेत देता है कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम की दिव्य उपस्थिति और आशीर्वाद सदा विद्यमान रहेगा। यह ध्वज न केवल मंदिर की शोभा है, बल्कि करोड़ों भक्तों के विश्वास, संकल्प और सदियों की तपस्या का प्रतीक है जो आज स्वर्ण अक्षरों में इतिहास बन गया।
अयोध्या का पवित्र ध्वज: आस्था का अनंत संदेश
सूर्य, ॐ और कोविदार वृक्ष ये तीनों चिह्न मिलकर सनातन धर्म की उस धारा को दर्शाते हैं, जो जन्म, ऊर्जा, परंपरा और अनंत दिव्यता का संगम है। अयोध्या में फहराता यह पवित्र ध्वज केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि यह संदेश देता है कि धर्म, सत्य और मर्यादा का मार्ग ही जीवन का सबसे श्रेष्ठ पथ है। अयोध्या की पवित्र धरती पर फहराता यह ध्वज आने वाली सदियों तक प्रभु श्रीराम की दिव्यता, मर्यादा और धर्म की ज्योति को संसार में फैलाता रहेगा।